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अरब तहरीक-ए- इन्क़िलाब इस्लामी बेदारी की तहरीक

फ़लस्तीनी वज़ीर-ए-आज़म इस्माईल हनिया ने मिस्री हुकूमत से मुतालिबा किया है कि वो महसूर शहर और मिस्र के दरमयान शहर की वाहिद ज़मीन गुज़रगाह रफ़ाह सरहद को मुस्तक़िल बुनियादों पर खोल दे। इन का कहना है कि इसराईल की जानिब से ग़ज़ा की पट

फ़लस्तीनी वज़ीर-ए-आज़म इस्माईल हनिया ने मिस्री हुकूमत से मुतालिबा किया है कि वो महसूर शहर और मिस्र के दरमयान शहर की वाहिद ज़मीन गुज़रगाह रफ़ाह सरहद को मुस्तक़िल बुनियादों पर खोल दे। इन का कहना है कि इसराईल की जानिब से ग़ज़ा की पट्टी के लाखों शहरी गुज़शता छः साल से ज़ालिमाना मआशी (माली)नाका बंदीयों का शिकार हैं।

बैरूनी दुनिया से ग़ज़ा के अवाम के राबते का वाहिद ज़रीया रफ़ाह राहदारी है। मिस्र की नई हुकूमत को चाहिए कि वो ग़ज़ा की बैरून-ए-मुल्क राबते की वाहिद गुज़रगाह रफा को जल्द मुस्तक़िल बुनियादों पर खोले।

उन्हों ने कहा कि आलम –ए-अरब में जारी इन्क़िलाब की तहरीक दर असल एक इस्लामी बेदारी की तहरीक है। इस तहरीक का फ़लस्तीनीयों को फ़ायदा पहुंचना चाहिए।

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