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अलगाववादी नेता मसरत आलम को अदालत ने फिर दिया रिहाई का आदेश

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अलगाववादी नेता मसरत आलम भट्ट को एक बार फिर अदालत ने रिहाई का आदेश दिया है। श्रीनगर के मजिस्ट्रेट की अदालत ने गुरूवार को मसरत आलम के रिहाई का आदेश दिया।

मसरत आलम को 2010 में जन सुरक्षा अधिनियम (पी.एस.ए.) के तहत गिरफ्तार किया गया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उनपर लगे पी.एस.ए को खारिज कर दिया था। फिलहाल मसरत आलम बारामूला जेल में बंद हैं और लगातार अदालती अदेशों पर जेल से अंदर-बाहर होते रहे हैं। मसरत पर 50 से अधिक मामले दर्ज हैं और 35 से अधिक बार उन पर पी.एस.ए. लगाया जा चुका है। मसरत को दिसंबर महीने में भी अदालत ने रिहा करने को कहा था, लेकिन उन्हें फिर से दूसरे अरोपों में गिरफ्तार करने का अदेश दे दिया गया था।

गौरतलब है कि मसरत आलम को अक्टूबर 2010 में श्रीनगर के गुलाब बाग इलाके से गिरफ्तार किया गया था। तब गिलानी के करीबी माने जाने वाले मसरत के ऊपर दस लाख रुपये का इनाम भी रखा गया था। उन पर आरोप है कि 2008-10 में राष्ट्रविरोधी प्रदर्शनों को लीड किया और उस दौरान लोगों से पत्थरबाजी करवाई जिसमें 112 लोग मारे गए। मसरत के खिलाफ देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का भी आरोप है।

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