Wednesday , December 13 2017

अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी का हफ़्ता को ख़ुतबा

नायब सदर जम्हूरिया मुहम्मद हामिद अंसारी 29 मार्च को अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के सालाना जलसा तक़सीम अस्नाद में कलीदी ख़ुतबा देंगे। जनाब हामिद अंसारी जो ख़ुद भी अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी (ए एम यू) के फ़ारिगुत्तहसील हैं।

नायब सदर जम्हूरिया मुहम्मद हामिद अंसारी 29 मार्च को अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के सालाना जलसा तक़सीम अस्नाद में कलीदी ख़ुतबा देंगे। जनाब हामिद अंसारी जो ख़ुद भी अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी (ए एम यू) के फ़ारिगुत्तहसील हैं।

इस यूनीवर्सिटी के 91 वीं कानोकीशन में 500 ग्रैजूएटस, पोस्ट ग्रैजूएटस और पी एचडी तलबा-ओ-तालिबात को अस्नाद देंगे। इस कानोकीशन में उत्तराखंड के गवर्नर अज़ीज़ क़ुरैशी और मुत्तहदा अरब इमारात के मुमताज़ सनअतकार यूसुफ़ अली को डी लट की एज़ाज़ी डिग्रियां दी जाएंगी। ए एम यू का पहला सालाना जलसा तक़सीम अस्नाद 1922 में हुआ था।

75 तलबा-ओ-तालिबात को डिग्रियां दी गई थीं। इस बावक़ार इदारा की बानी चांसलर बेगम सुलतान जहां ने जलसा तक़सीम अस्नाद की सदारत की थी। बेगम सुलतान जहां उस वक़्त रियासत भोपाल की हाकिम फ़रमांरवा भी थीं।सर सय्यद अहमद ख़ान ने बर्तानवी सामराज के दौर हुक्मरानी के दौरान मुस्तक़बिल के तक़ाज़ों को मल्हूज़ रखते हुए तन-ए-तनहा इस यूनीवर्सिटी के क़ियाम का बेड़ा उठाया था। अंग्रेज़ी ज़रिया तालीम के इंतिख़ाब पर ख़ुद मुसलमानों ने उनकी सख़्त मुख़ालिफ़त की थी।

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