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अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी तहज़ीबी-ओ-सक़ाफ़्ती इक़दार की मुहाफ़िज़-ओ-अलमबरदार

सुलतान उल-उलूम एजूकेशन सोसाइटी में तहनेती तक़रीब , लेफ़टनेंट जनरल ज़मीरुद्दीन शाह का ख़िताब

सुलतान उल-उलूम एजूकेशन सोसाइटी में तहनेती तक़रीब , लेफ़टनेंट जनरल ज़मीरुद्दीन शाह का ख़िताब

वाइस चांस्लर अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी लेफ़टनेंट जनरल ज़मीरुद्दीन शाह ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के क़ियाम का मक़सद ना सिर्फ़ मुसलमानों को आला तालीम से आरास्ता करना है बल्कि उनके तहज़ीबी और सक़ाफ़्ती इक़दार का तहफ़्फ़ुज़ भी है। वो आज सुलतान-उलूम एजूकेशन सोसाइटी की जानिब से उनके एज़ाज़ में मुनाक़िदा तहनेती तक़रीब से मुख़ातिब थे।

जनाब ख़ान लतीफ़ मुहम्मद ख़ान , मुहम्मद वली उल्लाह, ज़फ़र जावेद , डाक्टर मीर अकबर अली ख़ान, मीर ख़ैरुद्दीन अली ख़ान, कैप्टन अज़ीज़ बैग , ग़ियासुद्दीन बाबू ख़ान, अबदालालेम ख़ान के अलावा सोसाइटी के तहत क़ायम इदारों के ज़िम्मेदार भी इस मौक़े पर मौजूद थे।

लेफ्टनेंट जनरल ज़मीरुद्दीन शाह जो डिप्टी आर्मी चीफ रह चुके हैं, कहा कि सर सय्यद का ख़ाब सिर्फ़ मग़रिबी उत्तरप्रदेश के मुसलमानों को नहीं बल्कि तमाम हिन्दुस्तान के मुसलमानों को तालीम से आरास्ता करना था। वो उनके ख़ाबों को रूबा ताबीर करने के लिए कोशां हैं। उन्होंने बताया कि आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के तलबा-ए-की अक्सरियत अक़िलेती तबक़े से है जिन्हें वो मुल्क की दूसरी बड़ी अक्सरियत कहते हैं, क्योंकि अक़िलियत की इस्तिलाह एहसास कमतरी पैदा करती है।

उन्होंने बताया कि यूनीवर्सिटी के तहत 103 मह्कमाजात हैं, मुल्क के मुख़्तलिफ़ शहरों में इस के मराकज़ क़ायम किए गए हैं, जिस का मक़सद अलीगढ़ सब के लिए सरचश्मा फैज़ान साबित होसके। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी को मायानाज़ इदारा क़रार देते हुए बताया कि ये वाहिद यूनीवर्सिटी है जहां राय डिंग कलब है और अनक़रीब गोल्फ कोर्स भी मुहय्या किया जा रहा है।

नैनो टेक्नालोजी , वाटर टरेटमनट टेक्नालोजी,और सबज़ इन्क़िलाब के लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी अपनी मिसाल आप है।उन्होंने कहा कि मुस्लिम तलबा-ए-को कम्यूनीकेशन अस्क़लस पर तवज्जे देनी चाहिये, क्योंकि कहने की आदत से क़ाइदाना सलाहतें पैदा होती हैं।

लेफ्टनेंट जनरल ज़मीरुद्दीन शाह ने सुलतान उल-उलूम एजूकेशन सोसाइटी की ख़िदमात और इदारों की कारकर्दगी, मीआर तालीम की सताइश की और नेक तमन्नाओं का इज़हार किया। जनाब ज़फ़र जावेद ने ख़ैर मुक़द्दम किया। जनाब ख़ान लतीफ़ मुहम्मद ख़ान ने मोमनटो पेश किया। मिसिज़ सबीहा शाह भी इस मौक़े पर मौजूद थीं।

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