Thursday , November 23 2017
Home / India / अल्पसंख्यकों में अपनी छवि सुधारने की दिशा में मोदी का मुस्लिमों पर नया दांव

अल्पसंख्यकों में अपनी छवि सुधारने की दिशा में मोदी का मुस्लिमों पर नया दांव

नई दिल्ली: केन्द्र सरकार मुस्लिमों और दूसरे अल्पसंख्यकों को करीब लाने के लिए आज से अपने नए प्रोग्राम ‘प्रोग्रेस पंचायत’ की शुरुआत कर रही है. अल्पसंख्यक मंत्रालय की ओर से ‘ प्रोग्रेस पंचायत’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की समीक्षा की जाएगी. इसे मोदी सरकार की ओर से अल्पसंख्यकों में अपनी छवि सुधारने की दिशा में एक क़दम माना जा रहा है.

इन पंचायतों में उस इलाक़े के सभी अल्पसंख्यक हिस्सा ले सकते हैं. ऐसी पहली पंचायत आज हरियाणा के मेवात ज़िले के हथीन और बिछोर नामक गांवों में आयोजित होंगी. इनमें अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी के अलावा केंद्र सरकार के दो अन्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और कृष्णपाल गुर्जर भी शरीक होंगे.

पहली पंचायत हथीन में सुबह 10.25 पर और दूसरी पंचायत बिछोर में दोपहर 12.30 बजे आयोजित होगी. पंचायत में छात्रवृत्ति और मल्टी सेक्टोरेल डेवलेपमेंट प्रोग्राम( MSDP ) के तहत अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की मौक़े पर समीक्षा करने के साथ साथ फीडबैक भी लिया जाएगा.

प्रोग्रेस पंचायत के अलावा मंत्री पलवल के हथनी में लड़कियों के लिए 100 बिस्तरों वाले हास्टल और नूह और नगीना के स्कूलों में स्टाफ क्वाटर का उद्घाटन करेंगे. वे चिलवाली में एक मॉडल स्कूल की आधारशिला रखेंगे. देश भर में ऐसी 100 पंचायतों का आयोजन किया जाएगा. हरियाणा का मेवात ज़िला देश का एक ऐसा ज़िला है जहां मुसलमान बड़ी तादाद में हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक़ ज़िले में मुसलमानों की आबादी कुल आबादी का 79.2 फीसदी थी.

मोदी सरकार की योजना देशभर में ऐसी पंचायतों को आयोजित करने की है. देश भर में तक़रीबन 100 ऐसे पंचायतों का आयोजन होगा. हर आयोजन में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्त़ार अब्बास नक़वी शरीक़ होंगे. इस पंचायत के आयोजन पर सरकार पर अब सियासी कारणों और अगले साल यूपी में होने वाले चुनाव के मद्देनज़र मुसलमानों को लुभाने की कोशिश के आरोप लगने लगे हैं. सरकार ज़ाहिर तौर पर इसे नकार रही है. 2014 के आम चुनाव में बीजेपी को मुसलमानों का मात्र 8 फीसदी वोट ही मिल पाया था हालांकि वो 2009 में मिले वोट से 3 फीसदी ज्यादा था. ज़ाहिर है सरकार अब मुसलमानों में अपनी छवि सुधारना चाहती है.

TOPPOPULARRECENT