Friday , August 17 2018

अल्पसंख्यक‌ रीजर्वेशन, ए. पी.हाइकोर्ट का फ़ैसला रद करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने आज केन्द्रीय‌ तालीमी संस्थानों जैसे आईआईटी में अक़ल्लीयतों(अल्पसंख्यकों) के लिए 4.5फ़ीसद सब‌ कोटे पर आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट के फैसले को रद करने से इनकार किया । इस के साथ साथ अदालत ने इंतिहाई पेचीदा और ह

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने आज केन्द्रीय‌ तालीमी संस्थानों जैसे आईआईटी में अक़ल्लीयतों(अल्पसंख्यकों) के लिए 4.5फ़ीसद सब‌ कोटे पर आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट के फैसले को रद करने से इनकार किया । इस के साथ साथ अदालत ने इंतिहाई पेचीदा और हस्सास मसले पर हुकूमत के आमियाना रवैया पर सरज़निश की ।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर नाराज़गी जाहिर‌ कि कि केन्द्र हाइकोर्ट पर‌ इल्ज़ाम लगा रहा है जब कि ख़ुद केन्द्रीय सरकार‌ अपने मुक़द्दमे की ताईद में दस्तावेज़ पेश करने में नाकाम रही । जस्टिस के.एस.राधा कृष्णन और जस्टिस जे.एस.खीहर कि बंच ने मर्कजी वजारत फ़रोग़ इंसानी वसाइल( केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय) के रवैया पर भी तन्क़ीद(आलोचना) की जिस ने 28 मई को आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट के सुनाए गए फ़ैसला के ख़िलाफ़ जलदबाज़ी में सुप्रीम कोर्ट से रुजू होकर अपील दायर की । हालाँकि इस ने ओबीसी के लिए 27 फ़ीसद रीजर्वेशन‌ में 4.5 फ़ीसद सब‌ कोटे की पोलिसी को दुरुस्त‌ क़रार देने के लिए कोई दस्तावेज़ पेश नहीं किए ।

बंच ने किसी तरह की नोटिस जारी किए बगै़र ही एटार्नी जनरल गुलाम वाहनावती को हिदायत दी कि इस मसले पर कल इस से जुडे तमाम दस्तावेज़ पेश करें। इस के इलावा मामले की सुनवाइ बुधवार‌ तक मुलतवी करदी । बंच ने कहा कि वो हाइकोर्ट के हुक्म को उस वक़्त तक रद‌ नहीं करसकती जब तक हुकूमत एसा मवाद ना पेश करे जिस में तफ़सील के साथ ये वाज़िह किया जाये कि इस ने सब‌ कोटे की पोलिसी किस तरह तैयार की और उसे किस तरह अमली शक्ल दी गई ।

एटार्नी जनरल ने सारे मामले की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर लेने की कोशिश करते हुए कहा कि हाइकोर्ट ने सब‌ कोटा पोलिसी के ताल्लुक़ से नतीजाख़ेज़ मुबाहिस नहीं किए गए थे । उन्हों ने आईआईटी के लिए जारी काउंसलिंग कि वजह से किसी क़दर रीजर्वेशन‌ की ज़रूरत पर ज़ोर दिया । क्योंकि केन्द्र कि तरफ‌ से 4.5फ़ीसद सब‌ कोटे के तहत 325 उम्मीदवार दाख़िले के अहल क़रार पाए हैं ।

उन्हों ने कहा कि इन उम्मीदवारों के करीयर को सामने रखना ज़रूरी है और अगर उन्हें काउंसलिंग में शरीक होने की इजाज़त ना दी जाये तो उन का भवीष्य बर्बाद‌ होसकता है । जिस वक़्त वाहनावती ने ये कहा कि आई आई टी के लिए जारी काउंसलिंग कि वजह से किसी क़दर रीजर्वेशन‌ की ज़रूरत है तब बंच ने कहा कि हम स्टे ओर्डर जारी नहीं कर सकते ।

सब से पहले आप ( हुकूमत ) ने हाइकोर्ट में कोई दस्तावेज़ पेश नहीं किए । उन्हों ने कहा कि अगर आप एसा करते तो हमें ख़ुशी होती । बंच ने सीनीयर तरीन लो ऑफीसर से ये जानना चाहा कि आख़िर किस बुनियाद पर और किस तर्ज़ पर हुकूमत ने अक़ल्लीयतों (अल्पसंख्यकों)के लिए 4.5फ़ीसद सब‌ कोटा तय‌ किया । जब एटार्नी जनरल ने हाइकोर्ट के हुक्मनामा में ग़लतीयों की निशानदेही करने की कोशिश की तो उस वक़्त बंच ने कहाकि हाइकोर्ट की तरफ‌ से इस तरह के सवाल फ़ित्री हैं और केन्द्र इसी बात की शिकायत कर रहा है ।

बंच ने वाहनावती की दलील से इत्तिफ़ाक़ नहीं किया कि हाइकोर्ट ने फ़ैसला सुनाने में ग़लती की। बंच ने कहाकि जब 22 डिसम्बर 2011 के ऑफ़िस मैमोरंडम( ओ एम ) में जो 4.5फ़ीसद सब‌ कोटे से मुताल्लिक़ है किसी तरह की बात नहीं की गई तो फिर हाइकोर्ट का सवाल पूछना वाजिबी है । बंच ने कहा कि किसी तरह के दस्तावेज़ पेश किए बगै़र आख़िर हाइकोर्ट के फ़ैसले को क्योंकर ग़लत क़रार दिया जा सकता है ।

बंच ने कहा कि सब‌ कोटे से जुडे दस्तावेज़ नहीं पाए जाते और हाइकोर्ट ने भी यही कहा कि किसी तरह के दस्तावेज़ मौजूद नहीं । जब वाहनाव‌ती ने कहा कि हाइकोर्ट ने ज़ात पात की पहचान‌ के बारे में 1993 एलामीया को नजरअंदाज़ कर दिया तो बंच ने ये जानना चाहा कि क्या ये एलामीया हाइकोर्ट में पेश किया गया था या नहीं । इस बेहस पर बंच ने कहा कि आख़िर किस तरह आप हाइकोर्ट के फ़ैसले में ग़लती का दावा कर सकते हैं ।

बंच ने ये भी सवाल किया कि हुकूमत ने आख़िर किस तरह 27फ़ीसद ओबीसी कोटे को तकसीम‌ किया है । ये एक पेचीदा मामला है। आज हुकूमत 27 फ़ीसद कोटे में सब‌ कोटा दे रही है और कल इस कोटे में मज़ीद गुंजाइश दी जासकती है । जब वाहनावती ने कहा कि वो बंच को इस बात पर मुतमइन करेंगे कि किस तरह 4.5फ़ीसद रीजर्वेशन दिया गया तब बंच ने नाराज होकर‌ कहा कि आप हाइकोर्ट को भी मुतमइन कर सकते थे । पहले आप को ज़रूरी दस्तावेज़ पेश करना चाहीए । ये एक हस्सास मामला है और उसे यूं ही निमटा नहीं जा सकता ।

बंच ने कहा कि हुकूमत ने जिस अंदाज़ में इस हस्सास मसले पर ऑफ़िस मैमोरंडम जारी किया इस से हम ख़ुश नहीं हैं । हुकूमत को बहुत जयादा मुहतात होना चाहीए था हमें उस वक़्त ख़ुशी होती अगर क़ानूनी इदारों जैसे क़ौमी कमीशन बराए पसमांदा तबक़ात और क़ौमी अक़ल्लीयती कमीशन से मश्वरा किया जाता ।

केन्द्रीय सरकार‌ ने अक़ल्लीयतों(अल्पसंख्यको) को केंद्रीय शिक्षण संस्थाओं जैसे आईआईटी में ओबीसी के तहत 27फ़ीसद कोटे में अक़ल्लीयतों के लिए 4.5फ़ीसद कोटा खास‌ किया था जिसे आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट ने रद कर‌ दिया तब मर्कज़ी हुकूमत इस फ़ैसले को चैलेनज‌ करते हुए सुप्रीम कोर्ट गई ।

केन्द्र कि ये दलील थी कि हुकूमत ने असरदायक‌ सर्वे के बाद ही कोटा देने का फ़ैसला किया था लेकिन ये गुंजाइश ख़त्म‌ करते हुए हाइकोर्ट ने ग़लती की है । हाइकोर्ट ने 28 मई को अपने फ़ैसले में कहा था कि 4.5 फ़ीसद सब कोटा मंज़ूर करने के मामले में केन्द्र ने आमियाना रवैया इख़तियार किया है ।

अदालत ने कहा था कि ऑफ़िस मैमोरंडम के ज़रीये सब‌ कोटा महज़ मज़हबी बुनियाद पर दिया गया । इस के इलावा दुसरी एहलीय‌ती शर्तों को सामने नही रखा गया । मर्कज़ ने पाँच रियास्तों जिन में उत्तरप्रदेश और पंजाब में असेंबली चुनाव‌ से पहले 22 डीसम्बर 2011 को ऑफ़िस मैमोरंडम जारी करते हुए अक़ल्लीयती फ़िरक़ों से ताल्लुक़ रखने वाले समाजी और तालीमी पिछ्डे लोगों के लिए 4.5फ़ीसद सब‌ कोटे का एलान किया था ।

TOPPOPULARRECENT