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अल्लाह तआला और अल्लाह वालों की नसीहत

क़ुरान-ए-पाक में अल्लाह तआला का इरशाद है कि आप उनसे कहिए कि आओ मैं तुम को वो चीज़ें पढ़ कर सुनाऊं, जिनको रब ने हराम फ़रमाया है (यानी) अल्लाह तआला के साथ किसी को शरीक ना ठहराओ, माँ बाप के साथ एहसान किया करो, अपनी औलाद को क़त्ल मत किया करो, बे

क़ुरान-ए-पाक में अल्लाह तआला का इरशाद है कि आप उनसे कहिए कि आओ मैं तुम को वो चीज़ें पढ़ कर सुनाऊं, जिनको रब ने हराम फ़रमाया है (यानी) अल्लाह तआला के साथ किसी को शरीक ना ठहराओ, माँ बाप के साथ एहसान किया करो, अपनी औलाद को क़त्ल मत किया करो, बेहयाई के जितने तरीक़े हैं उनके पास भी मत जाओ, ख़ाह वो ऐलानीया हो या पोशीदा हो, जिसका ख़ून करना अल्लाह तआला ने हराम कर दिया है उसको क़त्ल मत करो, यतीम के माल के पास ना जाओ, नाप तौल पूरी पूरी किया करो इंसाफ़ के साथ, हम किसी शख़्स को इस के इम्कान से ज़्यादा तकलीफ़ नहीं देते, जब तुम बात किया करो तो इंसाफ़ (का तवाज़ुन) रखा करो, अल्लाह तआला से जो अह्द किया करो उसको पूरा किया करो, जिनका अल्लाह तआला ने तुमको ताकीदी हुक्म दिया है और ये दीन मेरा रास्ता है जो कि मुस्तक़ीम है। (सूरा अल अनाम।१५३)

और जब लुकमान (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटे को नसीहत करते हुए कहा कि बेटा! ख़ुदा के साथ किसी को शरीक ना ठहराना, बेशक बड़ा भारी ज़ुल्म है। और हमने इंसान को इसके माँ बाप के मुताल्लिक़ ताकीद की है, उसकी माँ ने ज़ोफ़ पर ज़ोफ़ उठाकर उसको पेट में रखा तो अपने माँ बाप की शुक्रगुज़ारी किया करो और दुनिया में उनके साथ ख़ूबी से बसर करना और इस राह पर चलना जो मेरी तरफ़ रुजू हो।

फिर तुम सब को मेरे पास आना है, फिर मैं बता दूंगा जो कुछ तुम करते थे। बेटा! अगर कोई अमल राई के दाना के बराबर हो, फिर वो किसी पत्थर के अंदर हो तब भी उसको अल्लाह तआला हाज़िर कर देगा। बेशक अल्लाह तआला बड़ा बारीकबीं और बाख़बर है। बेटा! नमाज़ पढ़ा करो, अच्छे कामों की नसीहत किया करो और बुरे कामों से मना किया करो और तुम पर जो मुसीबत वाकेय् हो इस पर सब्र किया करो, ये हिम्मत के कामों में से है।

और लोगों से अपना रुख़ मत फेरो और ज़मीन पर इतरा कर मत चलो। बेशक अल्लाह तआला किसी तकब्बुर करने वाले और फ़ख़र करने वाले को पसंद नहीं करता। (सूरा लुकमान।१२ता१८)

हुज़ूर अकरम ( स०अ०व०) ने इरशाद फ़रमाया तुम लोग मेरी सुन्नत को मज़बूती से पकड़ो और मेरे बाद ख़ुलफ़ाए राशिदीन के तरीक़े को मज़बूती से पकड़ो। रसूल अकरम ( स०अ०व०) से अल्लाह ताली ने फ़रमाया मक्का के पहाड़ को सोना बना दूं। लेकिन आप ( स०अ०व०) ने फ़रमाया नहीं क्योंकि लोग सोना चांदी के लिए दीन का काम करने लगेंगे, लिहाज़ा दीन में वो इख़लास या वो क़ुव्वत नहीं रहेगी, जिसके आगे क़ैसर-ओ-क़सरी की ताक़तें ज़ेर हो गईं। (मुरसला)

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