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असम: दो महीने के बीजेपी सरकार में बड़ा हमला, शुरुआती जांच में NDFB (S) पर शक

मई 2014 में केंद्र में मोदी सरकार ने सत्ता संभाली तो कुछ महीने बाद ही असम में उग्रवादियों ने सिलसिलेवार हमले कर 75 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया था. वो भी ऐसे समय में जब करीब दो महीने पहले ही असम में बीजेपी की सरकार बनी है. पीएम मोदी ने इन चुनावों के लिए खूब मेहनत की और पूर्वोत्तर में पहली बार अपनी पार्टी को सत्ता सौंपने में कामयाबी हासिल की.

लेकिन असम का कोकराझार शहर शुक्रवार को ताबड़तोड़ गोलियों और ग्रेनेड के धमाके से गूंज उठा. बालाजान तिनियाली बाजार में ऑटो रिक्शा में आए हमलावरों ने एके-47 से फायरिंग की जिसमें 13 लोग मारे गए और 50 घायल बताए जा रहे हैं. हालांकि, एक हमलावर मारा गया है लेकिन उसके साथी फरार हो गए हैं जिनकी तादाद 3-4 बताई जा रही है. सेना और स्थानीय पुलिस उनकी तलाश में जुट गई है.

शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक हमलावर उग्रवादी संगठन एनडीएफबी (एस) यानी नेशनल डेमोक्रैटिक फ्रंट के सोंगबजीत धड़े के थे. इस संगठन ने करीब दो साल पहले सूबे में एक के बाद एक कई हमले किए थे जिनमें 76 लोग मारे गए थे. ये हमले 23 दिसंबर 2014 को चिरांग, सोनितपुर और कोकराझार में हुए थे. उसी साल मई में इस तरह के हमले प्रवासी मुसलमानों पर हुए थे. जब केंद्र में 10 साल बाद नई सरकार प्रचंड बहुमत के सहारे सत्ता में आ रही थी. लेकिन दिसंबर 2014 का हमला पूर्वोत्तर भारत के इतिहास में सबसे बड़ा नरसंहार था.

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