Monday , December 18 2017

असल बाशिंदों को ही मिलेगी थर्ड-फोर्थ ग्रेड की मुलाज़िमत

मुक़ामी बाशिंदों का फ़ारमेट फाइनल हो गया। इसके मुताबिक असल बाशिंदे और झारखंड के रहने वाले की अलग-अलग शिनाख्त होगी। तय हुआ कि रियासती हुकूमत की थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरी सिर्फ असल बाशिंदों को दी जाएगी। प्रोजेक्ट भवन में जुमेरात

मुक़ामी बाशिंदों का फ़ारमेट फाइनल हो गया। इसके मुताबिक असल बाशिंदे और झारखंड के रहने वाले की अलग-अलग शिनाख्त होगी। तय हुआ कि रियासती हुकूमत की थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरी सिर्फ असल बाशिंदों को दी जाएगी। प्रोजेक्ट भवन में जुमेरात को हुई मुक़ामी फॉर्मेट कमेटी की बैठक में इस बात पर मंजूरी बनी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट वजीरे आला हेमंत सोरेन को सौंप दी है। रिपोर्ट सौंपने के बाद कमेटी के मेम्बर चंपई सोरेन, बंधु तिर्की और सरफराज अहमद वगैरह ने यह जानकारी दी। अब इस फॉर्मेट पर सभी दलों की बैठक होगी। फिर इसे कैबिनेट में लाया जाएगा।

क्या रहा है तनाज़ा

झारखंड तशकील के बाद 8 अगस्त 2002 को हुकूमत ने मुक़ामी पैमाना तय की थी। इसके मुताबिक वही शख्स मुक़ामी माने जाएंगे, जिनका अपना या खानदान के नाम जमीन के सर्वे रिकॉर्ड में रहेगा। अवामी मुफाद दरख्वास्त दायर होने के बाद हाईकोर्ट ने 27 नवंबर 2002 को हुकूमत के इस हुक्म को मंसूख कर दिया था और मुक़ामी बाशिंदों को फिर से बताने का हुक्म दिया था। साथ ही मुक़ामी शख्स की शिनाख्त के लिए हिदायत मुकर्रर करने के लिए हुकूमत को आज़ादी दी थी। तभी से मुक़ामी दर्जा बंदी करने का मामला ज़ेरे गौर है।

खतियान में जिसका नाम, वही असल बाशिंदा

असल बाशिंदे वही होंगे, जो यहां के रैयत हैं और जिनका नाम खतियान में दर्ज है। बे ज़मीन असल बाशिंदों के लिए खुसुसि तजवीज किया गया है। ग्रामसभा को यह हक़ होगा कि वह ऐसे लोगों की शिनाख्त करे, जो यहां के असल बाशिंदे तो हैं, लेकिन सर्वे के वक़्त उनके पास जमीन नहीं थी। ग्रामसभा सर्टिफिकेट देगी कि यह खानदान झारखंड का असल बाशिंदे है, पर सर्वे के वक़्त उसके पास ज़मीन नहीं था। मगर इनका नाम राजस्व ग्राम के बेज़मीनों की फेहरिस्त में दर्ज होना चाहिए।

15/11/85 से रह रहे लोग झारखंड के बाशिंदे

15 नवंबर 1985 से रियासत में रह रहे लोग, जिनकी यहां पर जायदाद है, वे झारखंड के बाशिंदे होंगे। रियासत तशकील के वक़्त झारखंड तक़सीम के वैसे अफसर-मुलाज़िमीन, जो दूसरे रियासतों के होते हुए भी अपनी पूरी नौकरी यहां की, उन्हें झारखंड का ही माना जाएगा। वैसे तालिबे इल्म जिन्होंने चौथी क्लास से 10वीं तक की पढ़ाई झारखंड में की है, उन्हें भी झारखंड का ही बाशिंदा माना जाएगा।

TOPPOPULARRECENT