Thursday , December 14 2017

अस्करीयत पसंदी हामी नारे वादी कश्मीर में वापिस

श्रीनगर: श्रीनगर के मुज़ाफ़ात में दीवारों पर हम दौलत इस्लामीया चाहते हैं नारा तहरीर किया गया है। छोटे मज़हबी इजतिमाआत में अवाम पर ज़ोर दिया जा रहा है कि अस्करीयत पसंदी में शिरकत करें और शुमाली कश्मीर के इलाक़ा सोपोर से जुनूबी कश्मीर क

श्रीनगर: श्रीनगर के मुज़ाफ़ात में दीवारों पर हम दौलत इस्लामीया चाहते हैं नारा तहरीर किया गया है। छोटे मज़हबी इजतिमाआत में अवाम पर ज़ोर दिया जा रहा है कि अस्करीयत पसंदी में शिरकत करें और शुमाली कश्मीर के इलाक़ा सोपोर से जुनूबी कश्मीर के इलाक़ा अनंतनाग तक कई ऐसे वाक़ियात होचुके हैं जिन की वजह से पुलिस का हौसला पस्त होगया है।

सोपोर वादी कश्मीर का सेबों का क़स्बा समझा जाता है हाल ही में यहां पर 6शहरीयों की हलाकत के बाद जिन में से बाज़ साबिक़ अस्करीयत पसंद थे और समझा जाता है कि हिज़्ब उल-मुजाहिदीन के अलाहदा शूदा ग्रुप ने उन्हें हलाक किया था। चार अफ़राद दहशतगरदों की गोलीयों का सात दिनों में शिकार होगए।

इन हलाकतों से ख़ूँरेज़ी की जानिब क़य्यूम नज़र उर्फ़ नज़र वाला की तरफ़ अंगुश्तनुमाई होती है लेकिन पुलिस ने अभी तक इस पर शुबा नहीं किया है। क्योंकि वो सोपोर में तशद्दुद बरपा करचुका है। ताहम इस के ख़िलाफ़ कोई सबूत मौजूद नहीं है। श्रीनगर के मुज़ाफ़ात में निर्बल के इलाक़े में जो वाक़िया पेश आया जिस में एक ए एस आई और एक कांस्टेबल हलाक करदिए गए थे क्योंकि उन्होंने संगबारी करने वाले एक हुजूम पर गोली चलाई थी।

पुलिस पर हमला करनेवाली टीम फ़रार होगई और नफ़ाद क़ानून निज़ाम को मायूसी हुई। पुलिस ओहदेदारों का दावा है कि कोई अदालती तहक़ीक़ात मुनाक़िद नहीं की जा सकती जब तक कि किसी शख़्स पर क़तल का इल्ज़ाम आइद ना किया जाये। इंसिदाद अस्करीयत पसंदी कार्यवाईयों को ज़बरदस्त झटका लगा क्योंकि पुलिस तेज़ी से अपने वसाइल खो रही है और अवाम ने इस मुख़्बिरी की तादाद कम होती जा रही है। इंसानी सुराग़ रसानी तमाम इन्सिदाद-ए-दहशत गर्दी कार्यवाईयों की कामयाबी केलिए ज़रूरी है लेकिन ये ज़रिया ख़ुशक होचुका है। एक पुलिस ओहदेदार ने कहा कि हमारे कई ज़राए फ़रार होचुके हैं या फिर उन्होंने वफ़ादारियां तबदील करली हैं।

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