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अस्करीयत पसंदों को एहसास तशद्दुद से काम नहीं चलेगा: चिदम़्बरम

नई दिल्ली, ०७ जनवरी (पी टी आई) मर्कज़ी वज़ीर-ए-दाख़िला पी चिदम़्बरम ने आज एक अहम ब्यान देते हुए कहा कि अस्करीयत पसंदों को बिल आखिर ख़ुसूसी तौर पर जो शुमाल मशरिक़ी इलाक़ों में सरगर्म हैं, ये एहसास होगया है कि तशद्दुद से उन का भला होने वा

नई दिल्ली, ०७ जनवरी (पी टी आई) मर्कज़ी वज़ीर-ए-दाख़िला पी चिदम़्बरम ने आज एक अहम ब्यान देते हुए कहा कि अस्करीयत पसंदों को बिल आखिर ख़ुसूसी तौर पर जो शुमाल मशरिक़ी इलाक़ों में सरगर्म हैं, ये एहसास होगया है कि तशद्दुद से उन का भला होने वाला नहीं है और अगर वो अपने मसाइल की यकसूई चाहते हैं तो उन्हें मुज़ाकरात की मेज़ पर आना ही होगा।

मिस्टर चिदम़्बरम ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि मर्कज़ ने रियास्ती हुकूमतों के इश्तिराक से मुंदरजा बाला इलाक़ों में सरगर्म अस्करीयत पसंदों से निमटने मुतअद्दिद तरीका-ए-कार इस्तिमाल किए हैं जिस का सिलसिला गुज़श्ता दो सालों से जारी है।

सातवीं नॉर्थ ईस्ट बिज़नस सिमट से ख़िताब करते हुए मिस्टर चिदम़्बरम ने कहा कि बेशतर अस्करीयत पसंद ग्रुपस को इस बात का एहसास होगया है कि तशद्दुद का कोई मुसबत नतीजा नहीं निकल सकता। हुकूमत किसी भी अस्करीयत पसंद ग्रुप को हावी होने का मौक़ा हरगिज़ नहीं देगी अगर अस्करीयत पसंद चाहते हैं कि इन के मसाइल पर ग़ौर-ओ-ख़ौस किया जाय तो इस के लिए मुज़ाकरात ही वाहिद मुतबादिल हैं।

ये एक ख़ुश आइंद बात है कि देर आयद दरुस्त आयद के मिस्दाक़ अस्करीयत पसंदों की अक्सरीयत अब बातचीत करने में दिलचस्पी रखती है और शायद यही वजह है कि शुमाल मशरिक़ी इलाक़ों में अब अमन है वर्ना हर गुज़रने वाले दिन के साथ वहां हलाकतों का बाज़ार गर्म रहता था।

इस के बावजूद भी बाअज़ इलाक़े ऐसे हैं जहां रक़ूमात की जबरी वसूली और तावान की रक़म के हुसूल के लिए अग़वा के वाक़ियात रौनुमा हुए हैं।

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