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अहमदाबाद के सलीम जो पतंग की फ़िरकी से दिलों के मैल मिटाते हैंं

अहमदाबाद: उत्तरायण के अवसर पर गुजरात में पतंग उड़ाने का रिवाज है। इस दिन बुजुर्ग से लेकर युवा तक अपने अपने घरों की छतों पर रंगीन पतंग उड़ा कर पूरे आकाश को रंगीन बना देते हैं। इस त्योहार को लेकर जहां हिंदू समुदाय के लोगों में खुशी का माहौल देखने को मिलता है वहीं इस त्योहार के आगमन पर मुस्लिम समुदाय के लोगों के कामकाज में भी रौनक आ जाती है। अहमदाबाद के कालूपूर में रहने वाले सलीम ने हिंदुओं के इस त्योहार पर अनूठी राष्ट्रीय एकता की सौगात दी है।

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चौदह जनवरी उत्तरायण त्योहार को लेकर बाजार सज गए हैं और गुजरात के लोग जमकर पतंग और डोरियाँ खरीद में लगे नजर आ रहे हैं।वहीं कालूपुर क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से फ़िरकी (पतंग की डोरी लपेटने वाला उपकरण) के व्यापार से जुड़े सलीम भाई ने पूरे अहमदाबाद की सबसे बड़ी फ़िरकी बनाकर लोगों को चौंका दिया है। इस फ़िरकी का वजन पूरे पचास किलो है। वहीं सलीम भाई ने इस्पात राष्ट्रीय एकता वाली फ़िरकी भी बनाई है।

इस संबंध में सलीम का कहना है कि गुजरात में इस त्योहार को हिंदू मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ मनाते हैं। इसलिए राष्ट्रीय एकता का संदेश देने वाली फिर से बना है।सलीम की फ़िरकी पूरे गुजरात में प्रसिद्ध है। उनके यहां गुजरात के हर कोने से लोग फ़िरकी लेने आते हैं।

लेकिन वह बड़ी अफसोस के साथ कहते हैं कि लोग अब चाइनीज डोरी खरीदने लगे हैं, जो काफी हानिकारक है और इसी चाइनीज डोरयों की वजह से लोगों को त्योहार के इन दिनों में अपनी जान गंवानी पड़ती है। सलीम खुद तो अपनी दुकान पर चाइनीज डोरी नहीं रखते हैं। साथ ही साथ खरीदारों से अपील करते हैं कि वह चाइनीज डोरियां न खरीदें।

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