अहम मसाएल पर हुकूमत अपोज़ीशन को एतेमाद में लेने में नाकाम

अहम मसाएल पर हुकूमत अपोज़ीशन को एतेमाद में लेने में नाकाम
बी जे पी और बाएं बाज़ू की जमातों ने आज हुकूमत पर तन्क़ीद करते हुए कहा कि वो बे सिम्त हो गई है और अहम बिल्स पर अपोज़ीशन जमातों को एतेमाद में नहीं लिया जा रहा है । बी जे पी ने हुकूमत से कहा कि वो अहम क़वानीन की मंज़ूरी के लिए तमाम जमातों से मु

बी जे पी और बाएं बाज़ू की जमातों ने आज हुकूमत पर तन्क़ीद करते हुए कहा कि वो बे सिम्त हो गई है और अहम बिल्स पर अपोज़ीशन जमातों को एतेमाद में नहीं लिया जा रहा है । बी जे पी ने हुकूमत से कहा कि वो अहम क़वानीन की मंज़ूरी के लिए तमाम जमातों से मुशावरत के ज़रीया इत्तेफ़ाक़ राय पैदा करने की कोशिश करे।

बी जे पी के सीनीयर लीडर मिस्टर रवी शंकर प्रसाद ने कहा कि अहम मसाएल पर ख़ुद यू पी ए हलीफ़ जमातों में इत्तेफ़ाक़ राय नहीं है, जिस के नतीजा में रीटेल शोबा में सरमाया कारी जैसा अहम पालिसी साज़ फ़ैसला भी मुतास्सिर हुआ है। उन्होंने कहा कि इत्तेफ़ाक़ राय की तैयारी एहमीयत की हामिल है और बहैसीयत अपोज़ीशन हमें इसकी ताईद करनी है, लेकिन यकतरफ़ा कोशिशों से इत्तेफ़ाक़ राय नहीं हो सकता।

इसके लिए हुकूमत को कोशिशें करनी चाहीए। सी आई आई कान्क्लेव में हिस्सा लेते हुए इन्होंने कहा कि हुकूमत ख़ुद अपनी हलीफ़ जमातों के दबाव को देखते हुए अहम पालिसी फ़ैसलों को वापस लेने पर मजबूर हो गई है। उन्होंने कहा कि हुकूमत कोई फ़ैसला करती है, लेकिन हलीफ़ जमातों का दबाव बनते ही इस से दस्तबरदार हो जाती है।

ये रविष दुरुस्त नहीं है। सी पी एम लीडर मिस्टर सीताराम यचोरी ने भी हुकूमत को तन्क़ीद का निशाना बनाया और कहा कि वो सिम्त से आरी हो गई है और कोई अहम काम अंजाम नहीं पारहे। इन्होंने कहा कि इत्तेहादी सियासत एक मजबूरी बन गई है। ज़रूरत इस बात की हैकि हुकूमत एक सिम्त में काम करे जबकि आज हम ये देख रहे हैं कि हुकूमत किसी सिम्त से आरी है।

इन्होंने कहा कि यूपी ए ने पहली मीयाद में भी मख़लूत हुकूमत चलाई थी, लेकिन आज इस का तर्ज़-ए-अमल बदल गया है। पहली मीयाद मैं बाएं बाज़ू की मुख़ालिफ़त और हुकूमत की ताईद से दसतबरदारी के बावजूद हिंद । अमरीका न्यूक्लीयर मुआहिदा किया गया। ताहम आज हलीफ़ जमातों की धमकीयों और इक़्तेदार की बरक़रारी के मक़सद से अहम फ़ैसलों से दसतबरदारी इख्तेयार की जा रही है। इस तरह हुकूमत अवाम को बेवक़ूफ़ बना रही है। हुकूमत बारहा मख़लूत सियासत की मजबूरीयों का रोना रो रही है जो दुरुस्त नहीं है।

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