Monday , December 18 2017

अज़ान की पहली आवाज़ सुनकर दिहात के ज़ईफ़ अफ़राद आबदीदा

गुलबर्गा 08 दिसंबर:बाग़ हपरगा ताल्लुक़ा बिस्वा कल्याण का एक छोटा दिहात है गुलबर्गा रोड पर कमलापूर से 8 किलो मीटर की दूरी पर वाक़्ये है जहां 15 मुस्लमान घर आबाद हैं जहां कोई मस्जिद नहीं थी मुफ़्ती ग़ुलाम यज़्दानी इशाअती सदर जमीयते उलमा ज़िला बीदर ने साल पिछ्ले माह मार्च में तवक्कल अला अल्लाह पर मस्जिद का संग-ए-बुनियाद रखा अह्ले ख़ैर हज़रात की तवज्जा से अमजद अली और ज़ाकिर हुसैन इंजीनियर बीदर की कोशिशों से अलहमदु लिल्लाह मुख़्तसर वक़्त में शानदार मस्जिद की तामीर अमल में आई ,मस्जिद के इफ़्तेताह के मौके पर जूंही मस्जिद से नमाज़ ज़ुहर के लिए पहली अज़ान की आवाज़ गूँजने लगी अज़ान की आवाज़ सुनकर मुक़ामी एक ज़ईफ़ बुज़ुर्ग आब-दीदा हो गए और कहने लगे मेरी उम्र 81 साल हो गई अपने गावं में पहली मर्तबा अज़ान की आवाज़ कानों में गूंज रही है ख़ुशी की इंतिहा ना रही ख़ुद ब-ख़ुद आँसू जारी हो गए , इस मस्जिद के इफ़्तेताही जलसे से ख़िताब करते हुए मौलाना मुहम्मद फ़य्याजुद्दीन क़ासिमी हम्नाबाद ने कहा कि मस्जिदें शाइर इस्लाम हैं जिसकी इस्लाम में बहुत बड़ी एहमीयत है।

मौलाना ने नमाज़ों की तलक़ीन करते हुए कहा कि नमाज हुज़ूर-ए‍पाक सल्लललाहु अलैहि वसल्लम की आँखों की ठंडक है हुज़ूरे पाक सल्लललाहु अलैहि वसल्लम से सच्ची मुहब्बत का तक़ाज़ा ये हैके नमाज़ के ज़रीये से आप सल्लललाहु अलैहि वसल्लम की आँखों को ठंडक पहुंचाई जाये ,मस्जिद जाकर बाजमाअत नमाज़ अदा करना घर पर तन्हा नमाज़ पढ़ने से 27 दर्जा अफ़ज़ल है, अज़ान की आवाज़ जितनी दूर जाती है शैतान वहां से भाग जाता है,मौलाना अतीक़ अहमद क़ासिमी ज़हीराबाद ने अपने ख़िताब में कहा के मस्जिदों से हमारा वालहाना ताल्लुक़ होना चाहीए क्युंकि ज़िंदगी की सारी ज़रूरीयात की तकमील अल्लाह पाक ने नमाज़ ही में रखी है नमाज़ अल्लाह से मांगने का ज़रीया है।

बीदर ,गुलबर्गा और कमलापूर से बिरादराने इस्लाम की कसीर तादाद ने शिरकत की ज़ुहराना का भी नज़म किया गया था।मौलाना अतीक़ अहमद क़ासिमी की दुआ से जलसे का इख़तेताम अमल में आया।

TOPPOPULARRECENT