अफ़ज़ल गुरु की फांसी क़ानून के तक़ाज़ों की तकमील : शुक्ला

अफ़ज़ल गुरु की फांसी क़ानून के तक़ाज़ों की तकमील : शुक्ला

नई दिल्ली / मैलबोर्न 13 फरव‌री : वज़ीर बराए पारलियामानी उमोर राजीव शुक्ला जो फ़िलहाल एक हिन्दुस्तानी ख़ैरसिगाली वफ़द के साथ ऑस्ट्रेलिया के दौरा पर हैं ने अफ़ज़ल गुरु की फांसी को क़ानून के तक़ाज़ों की तकमील से ताबीर किया और कहा कि इन क़ानूनी तक़ाज़ों की तकमील में हालाँकि ताख़ीर ज़रूर हुई है लेकिन जैसा कि मोदी ने कहा था कि देर आयद दरुस्त आयद बिल्कुल इसी तरह में भी ये कहता हूँ कि देर से ही सही इंसाफ़ के तक़ाज़े पूरे हुए ।

दीगर मुआमलात पर जैसे साबिक़ वज़ीर-ए-आज़म राजीव गांधी के क़तल पंजाब के साबिक़ वज़ीर-ए-आला बिनीत सिंह के क़तल मुआमलात पर तबसरा करते हुए उन्होंने कहा कि हर मुआमला की तकमील होगी । बस क़ानून अपना काम कररहा है । किसी मुआमला की यकसूई की आजलाना तौर पर हो जाती है और कोई मुआमला ताख़ीर का शिकार होजाता है ।

लिहाज़ा ये ना समझें कि इन दीगर मुआमलात की यकसूई नहीं होगी या उन पर कोई फ़ैसला नहीं सुनाया जाएगा । याद रहे कि पारलियामेंट पर हमले के मुजरिम अफ़ज़ल गुरु को दिल्ली की तिहाड़ जेल में 9 फरवरी को उस वक़्त फांसी दे दी गई जब सदर जमहूरीया प्रनब मुख‌र्जी ने उस की रहम की दरख़ास्त 3 फरव‌री को मुस्तर्द करदी थी।

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