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अफ़ज़ल गुरु को फांसी : सदर जम्हूरीया की संगीन ग़लती

नई दिल्ली, 15 फरवरी: (एजेंसी) मुल्क के ज़ाइद अज़ 200 माहिरीन तालीम मुसन्निफ़ीन फ़नकार और फ़िल्म साज़ों ने सदर जम्हूरीया परनब मुखर्जी को मकतूब लिख कर कहा कि उन्होंने अफ़ज़ल गुरु को फांसी देने की राह फ़राहम करते हुए संगीन ग़लती की है ।

नई दिल्ली, 15 फरवरी: (एजेंसी) मुल्क के ज़ाइद अज़ 200 माहिरीन तालीम मुसन्निफ़ीन फ़नकार और फ़िल्म साज़ों ने सदर जम्हूरीया परनब मुखर्जी को मकतूब लिख कर कहा कि उन्होंने अफ़ज़ल गुरु को फांसी देने की राह फ़राहम करते हुए संगीन ग़लती की है ।

इन दानिश्वरों ने सदर जमहूरीया के रवैय्या पर अपनी शदीद नाराज़गी और ग़म-ओ-ग़ुस्सा का इज़हार किया । चहारशंबा को सदर जम्हूरीया को रवाना करदा मकतूब में इन शख़्सियतों ने कहा कि हमारा ईक़ान है कि आप ने अफ़ज़ल गुरु के ताल्लुक़ से दरख़ास्त रहम को मुस्तर्द करके संगीन ख़िलाफ़वरज़ी की ।

जम्हूरी मुल्क में अमन रवादारी इंसाफ़ और क़ौमी रिश्तों का गला घोंट दिया गया । बा अल्फ़ाज़ दीगर अफ़ज़ल गुरु के साथ इंसाफ़ नहीं किया गया । मकतूब में लिखा गया है कि अगर आप ने तहत की अदालत के रिकार्ड का जायज़ा लिया होता और वुकला-ओ-इंसानी हुक़ूक़ के कारकुनों की जानिब से बरसों से तैयार करदा तवील दस्तावेज़ात का मुशाहिदा करते या सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसला का ही बग़ौर मुताला करते जिसने अफ़ज़ल गुरु को सज़ाए मौत दी तो आपको इस सच्चाई का इल्म होता कि उसकी ख़ता को साबित ही नहीं किया गया ।

सच बात तो ये है कि अफ़ज़ल गुरु के ख़िलाफ़ वाजिबी शुबा को भी क़ायम नहीं किया गया । हम आप को ये मकतूब गहरे सदमा के साथ लिख रहे हैं । इस मुल्क में एक फ़र्द की बेबसी पर तरस आता है जिसको क़ानून से राहत नहीं मिली अफ़ज़ल गुरु को 9 फ़रवरी बरोज़ हफ़्ता राज़दाराना तौर पर तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई ।

इस फांसी के बाद हमको बताया गया कि आपने अफ़ज़ल गुरु की अहलिया तबस्सुम की दरख़ास्त रहम को 3 फ़बरोरी को मुस्तर्द कर दिया था । मकतूब में ये भी दावा किया गया है कि अफ़ज़ल गुरु को उसकी हयात में क़ानूनी हक़ से महरूम रखा गया । जनाब आपने रफ़ीक़ अलक़लब रखने के बावजूद दरख़ास्त रहम को मुस्तर्द कर दिया ।

हर सज़ा-ए-याफ़ता जिसकी दरख़ास्त रहम को सदर जम्हूरीया की जानिब से मुस्तर्द कर दिया जाता है उसकी आख़िरी उम्मीद टूट जाती है । हर सज़ा-ए-याफ़ता को ये दस्तूरी हक़ हासिल है कि वो अदलिया के फ़ैसला पर नज़रेसानी करने हाइकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में उसकी सज़ा की तामील में ताख़ीर की दरख़ास्त कर सकता है ।

क़ानून के तहत अफ़ज़ल गुरु आपकी जानिब से दरख़ास्त रहम के इस्तिर्दाद ( लौटा लेने ) के बावजूद हनूज़ बक़ैद हयात रह सकते थे । आया अफ़ज़ल गुरु उनके ख़ानदान वालों और वुकला को उनकी दरख़ास्त रहम को मुस्तर्द कर देने के बारे में इत्तिला दी गई थी ? लेकिन ऐसा नहीं हुआ इस वाक़िया को राज़ में रख कर फांसी दी गई ।

इन् माहिरीन तालीम और दानिश्वरों ने अफ़ज़ल गुरु को फांसी देने की उजलत पसंदी की वज़ाहत तलब की है । हकूमत-ए-हिन्द को ये वाज़िह करना होगा कि आख़िर अफ़ज़ल गुरु को राज़दाराना तौर पर फांसी देने की क्या जल्दी थी ।

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