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अफ़्ग़ानिस्तान:मुजव्वज़ा अमरीकी मुआहिदे के ख़िलाफ़ मुज़ाहरा

काबुल २१ नवंबर (ए एफ़ पी) चार रोज़ा जरगे में क़बाइली रहनुमाओं ने मुआहिदे के लिए मशरूत हिमायत का ऐलान किया ही।मशरिक़ी अफ़्ग़ानिस्तान में एक हज़ार के क़रीब अफ़राद ने मुल्क में अमरीकी फ़ौज के दो हज़ार चौदह के बाद क़ियाम के मुजव्वज़ा मंसूबे के ख़

काबुल २१ नवंबर (ए एफ़ पी) चार रोज़ा जरगे में क़बाइली रहनुमाओं ने मुआहिदे के लिए मशरूत हिमायत का ऐलान किया ही।मशरिक़ी अफ़्ग़ानिस्तान में एक हज़ार के क़रीब अफ़राद ने मुल्क में अमरीकी फ़ौज के दो हज़ार चौदह के बाद क़ियाम के मुजव्वज़ा मंसूबे के ख़िलाफ़ मुज़ाहरा किया हैं।

मता हरेन जिन में ज़्यादा ताद तलबा की थी मर्कज़ी शाहरा बंद कर दी हैं। इसी बारे में अफ़्ग़ानिस्तान में ताय्युनात ग़ैर मुल्की अफ़्वाज को दो हज़ार चौदह में वापिस चले जाना हैं।

लेकिन नए तजवीज़ करदा मंसूबे के मुताबिक़ अमरीका के साथ दस साल पर मुहीत स्कियोरटी मुआहिदा किया जाएगा।इस से पहले अफ़्ग़ानिस्तान के सदर हामिद करज़ई अमरीका के साथ दस साला दिफ़ाई तआवुन पर बातचीत के लिए क़बाइली रहनुमाओं और अमाइदीन की हिमायत हासिल करने में कामयाब हो गए हैं।

मुजव्वज़ा मंसूबे के तहत अमरीकी फ़ौज दो हज़ार चौदह में दीगर बैन अल्को अम्मी अफ़ोज के इन्ख़िला के बाद भी अफ़्ग़ानिस्तान में रहेगी।लेकिन काबुल में रिवायती लोया जरगे में शामिल मंदूबीन ने इस मंसूबे के लिए बाअज़ शराइत रखी हैं।

बीबी सी की नामा निगार ओरला गोरीन के मुताबिक़ चार रोज़ा जरगे में शामिल मंदूबीन ने मंसूबे की हिमायत तो की है लेकिन उन की जानिब से पेश की गई शराइत किसी मुआहिदे तक पहुंचने में रुकावट भी हो सकती हैं।
पहले ही इस मसले पर होने वाले मुज़ाकरात लग भग एक साल जारी थी। जरगे के मंदूबीन ने बैन-उल-अक़वामी फ़ौज की जानिब से रात के वक़्त किए जाने वाले हमलों के ख़ातमे का मुतालिबा किया जिन्हें अफ़्ग़ान नफ़रत की निगाह से देखते हैं। दूसरी जानिब अमरीकी फ़ौजी ऐसे हमलों को नागुज़ीर क़रार देते हैं।

मंदूबीन ने क़ैदीयों को अफ़्ग़ान ओहदेदारों की हिरासत में देने के साथ साथ इन अमरीकी शहरीयों के ख़िलाफ़ मुक़द्दमात चलाने का मुतालिबा किया जिन्हों ने अफ़्ग़ानिस्तान में जराइम किये।जरगे में इन तालिबान के साथ अमन मुज़ाकरात की भी ताईद की गई जो तशद्दुद तर्क करने के ख़ाहिशमंद हैं।

ताहम जरगे के फ़ैसले क़ानूनी तौर पर पार्लीमान से जुड़े नहीं होते आख़िरी फ़ैसला मुल्की पार्लीमान ही करती है।

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