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अफ़्ग़ानिस्तान में मज़ीद हमलों का ख़दशा : रिपोर्ट

अमेरीकी ओहदेदारों का इसरार है कि इस हफ़्ता के शुरू में काबुल और अफ़्ग़ानिस्तान के दूसरे शहरों में जो मुनज़्ज़म हमले किए गए इन में हक़्क़ानी नेटवर्क का हाथ था। तजज़िया कारों का कहना है कि ये हमले जितने बड़े पैमाने पर किए गए और उन्हें जिस

अमेरीकी ओहदेदारों का इसरार है कि इस हफ़्ता के शुरू में काबुल और अफ़्ग़ानिस्तान के दूसरे शहरों में जो मुनज़्ज़म हमले किए गए इन में हक़्क़ानी नेटवर्क का हाथ था। तजज़िया कारों का कहना है कि ये हमले जितने बड़े पैमाने पर किए गए और उन्हें जिस अंदाज़ से तर्तीब दिया गया, इससे ज़ाहिर होता है कि हक़्क़ानी नेटवर्क ने अपनी महारत में इज़ाफ़ा कर लिया है।

ये वो अस्करीयत पसंद ग्रुप है जिसके अलक़ायदा और तालिबान के साथ क़रीबी रवाबित हैं। अमेरीकी नशरियाती इदारे वाइस आफ़ अमेरीका ( Voice of America) की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ रिटायर्ड अमेरीकी सिफ़ारत कार और जुनूबी एशीया के उमोर के माहिर माईक मालीनोसकी कहते हैं कि सरकारी इमारतों और नाटो के अड्डों पर किए जाने वाले हमले इस लिहाज़ से काबिल-ए-ज़िकर थे कि वो बड़े पैमाने पर किए गए और उन की मंसूबा बंदी ख़ूब सोच समझ कर की गई थी।

उन्होंने कहा कि मंसूबा बंदी का काम बहुत पहले से किया गया था। उन्होंने इलाक़ा की ख़ूब छानबीन की थी और पूरे इलाक़ा के नक़्शे बना लिए थे लिहाज़ा हम ये कह सकते हैं कि इन में काबुल के क़लब में हमला करने की सलाहीयत मौजूद है। हालिया बरसों में हक़्क़ानी नेटवर्क इस लिए मशहूर हुआ है कि अमेरीका और नाटो के बहुत से सिपाही इस के हाथों हलाक हुए हैं।

अमेरीका में अफ़्ग़ानिस्तान के साबिक़ सफ़ीर सैयद जव्वाद ने कहा कि ये यक़ीनन सबसे ज़्यादा ताक़तवर ग्रुप है। अफ़्ग़ानिस्तान से बाहर उन्हें बहुत ज़्यादा हिमायत हासिल है। नज़रियाती तौर पर वो कहीं ज़्यादा कट्टर हैं। तजज़िया कार कहते हैं कि नज़रिया के ज़ोर पर हक़्क़ानी नेटवर्क के लिए ख़ुदकुश बमबार और ग़ैर मुल्की जंगजू भर्ती करना मुम्किन हो जाता है जो ऐसे हमले करने को तैयार हो जाते हैं जिन में इन की मौत या उन का पकड़ा जाना यक़ीनी होता है।

इस ग्रुप के बानी जलाल उद्दीन हक़्क़ानी हैं जो सोवीयत फ़ौजों के ख़िलाफ़ लड़ने वाली फ़ौज के कमांडर थे। इन का बेटा सिराज हक़्क़ानी इस ग्रुप का ऑपरेशनल कमांडर है। सख़्त लड़ाई के बावजूद इन हमलों में निस्बतन बहुत कम सिवीलियन हलाक हुए और इस चीज़ पर अफ़्ग़ान स्कियोरिटी फोर्सेस की तारीफ़ हो रही है।

साबिक़ सफ़ीर जव्वाद कहते हैं मेरा ख़्याल है कि उन्होंने बहुत अच्छी तरह मुक़ाबला किया। सच्ची बात ये है कि जिस तरह हमारी इबतदा होनी थी, इसको देखते हुए उन की बहादुरी और उनकी पेशावराना महारत बेमिसाल थी।

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