अफ़्ग़ान जंग का ख़ातमा

अफ़्ग़ान जंग का ख़ातमा
सदर अमेरीका बारक ओबामा ने अफ़्ग़ानिस्तान से अमेरीकी अफ़्वाज की दसतबरदारी के ताल्लुक़ से अफ़्ग़ानिस्तान के सदर हामिद करज़ई के साथ मुआहिदा पर दस्तख़त कर लिए हैं। हामिद करज़ई गुज़शता कुछ अर्सा से अफ़्ग़ानिस्तान में अमेरीकी अफ़्वाज औ

सदर अमेरीका बारक ओबामा ने अफ़्ग़ानिस्तान से अमेरीकी अफ़्वाज की दसतबरदारी के ताल्लुक़ से अफ़्ग़ानिस्तान के सदर हामिद करज़ई के साथ मुआहिदा पर दस्तख़त कर लिए हैं। हामिद करज़ई गुज़शता कुछ अर्सा से अफ़्ग़ानिस्तान में अमेरीकी अफ़्वाज और खास तौर पर नाटो अफ़्वाज की मौजूदगी को ख़तम करने पर इसरार कर रहे थे और नाटो की फ़ौजी-ओ-फ़िज़ाई कार्यवाईयों पर खुल कर तन्क़ीदें करते हुए अपने मौक़िफ़ को वाज़िह कर रहे थे ।

सदर बारक ओबामा अल क़ायदा के सरबराह ओसामा बिन लादेन की हलाकत के एक साल की तकमील पर गैर मालना दौरा पर अफ़्ग़ानिस्तान आए थे और इस मौक़ा पर उन्होंने हामिद करज़ई के साथ मुआहिदा करने को क़तईयत दे दी । उन्होंने कहा कि वो अफ़्ग़ानिस्तान में अपने ज़िम्मा के कामों को जल्द मुकम्मल कर लेंगे और फिर यहां से अमेरीकी-ओ-नाटो अफ़्वाज का इन्ख़िला ( निकलना) शुरू हो जाएगा।

ओबामा का ये ऐलान दर असल अफ़्ग़ानिस्तान में अमेरीकी मक़सद-ओ-मुफ़ादात की तकमील का इशारा देता है । ताहम उन्होंने ये वाज़िह नहीं किया कि अफ़्ग़ानिस्तान में जारी नाटो की फ़ौजी कार्यवाईयों पर फ़ौरी तौर पर कोई रोक लगेगी । ख़ुद हामिद करज़ई ने भी इस ताल्लुक़ से कोई वाज़िह बात कहने से गुरेज़ किया है हालाँकि वो गुज़शता कुछ महीनों से मुसलसल ये कहते आ रहे थे कि नाटो के इन हमलों को बंद होना चाहीए जिन में आम शहरियों को भी निशाना बनाया जा रहा है ।

नाटो की फ़ौजी कार्यवाईयों में आम अफ़्ग़ान अवाम की हलाकतों पर अवाम में शदीद ब्रहमी पाई जाती है और सदर अफ़्ग़ानिस्तान ने इसी ब्रहमी को देखते हुए इस तरह के ब्यानात दिए थे और नाटो की कार्यवाईयों पर तन्क़ीदें की थीं लेकिन अब अमेरीका के साथ तय पाए मुआहिदा में उन्होंने नाटो और अमेरीकी अफ़्वाज की कार्यवाईयों को रोकने के ताल्लुक़ से एक भी लफ़्ज़ कहने से गुरेज़ किया है ।

सदर अमेरीका ने भी इस मौज़ू को छेड़ने से गुरेज़ करते हुए इस ताल्लुक़ से कुछ भी कहने से गुरेज़ किया है और इस तरह उन्होंने ये तास्सुर दिया है कि उन्हें अफ़्ग़ानिस्तान के अवाम की ब्रहमी और नाराज़गी की कोई परवाह नहीं है और इसके बगैर वो अफ़्ग़ानिस्तान में नाटो की फ़ौजी कार्यवाईयों और ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी रखने के हक़ में हैं।

इन हमलों को रोके बगैर अफ़्ग़ानिस्तान में जंग के ख़ातमा के ताल्लुक़ से यक़ीन दहानी बेसूद ही साबित होगी और इस का कोई फ़ायदा होने वाला नहीं है । ये एक ऐसी हक़ीक़त है जिससे इनकार की कोई गुंजाइश नहीं है ।

वैसे भी बारक ओबामा जिस जंग को रोकने और ख़ातमा की बात कर रहे हैं वो जंग तो यकतरफ़ा तौर पर कभी की ख़तम हो चुकी है । गुज़शता कुछ अर्सा से जो कुछ होता रहा वो जंगी इस्तेलाह में दर असल अध् मोए दुश्मन का तआक़ुब था जो अमेरीका और नाटो की अफ़्वाज करती रही हैं।

इस तआक़ुब में ताहम नाटो और अमेरीकी अफ़्वाज को कहीं कहीं जिस तरह की मुज़ाहमत और नुक़्सानात का सामना करना पड़ा था वो उस की तवक़्क़ुआत के बरअक्स थे । अमेरीका नाटो की मुत्तहदा अफ़्वाज के नाम पर अफ़्ग़ानिस्तान में अपने मक़ासिद की तकमील में कामयाब हो चुका है ।

यहां इस ने सबसे पहले रूसी अफ़्वाज के तसल्लुत को ख़तम किया । इसके लिए उन्हें तालिबान और अलक़ायदा को इस्तेमाल किया गया जिन्हें आज अमेरीका अपना दुशमन नंबर एक मानता है । मुसलसल बमबारी और दबाबों से निशाना बनाते हुए एक तवील जंग में इन अनासिर को अमला ख़तम कर देने के बाद भी अमेरीका को वहां मुज़ाहमत का सामना करना पड़ रहा है जो ये ज़ाहिर करता है कि जंग के ख़त्म हो जाने के बाद भी तालिबान हार मानने को तैयार नहीं हैं और अब हालात ऐसे पैदा होते जा रहे हैं जिन में अमेरीका ख़ुद वहां से राह फ़रार इख्तेयार करने पर सोचने के लिए मजबूर हो गया है ।

अफ़्ग़ान जंग के मसला पर बारक ओबामा को जिस तरह से ख़ुद अमेरीका में दाख़िली मुख़ालिफ़त का सामना है इस को देखते हुए भी मिस्टर ओबामा इस जंग से फ़रार इख्तेयार करना चाहते हैं। वैसे भी अमेरीका और ओबामा की नज़र में गुज़शता साल अल क़ायदा सरबराह ओसामा बिन लादेन को एक हमला में हलाक कर देने के बाद अब अफ़्ग़ानिस्तान में इनके लिए कुछ बाक़ी नहीं बचा है जिस को पेश करते हुए वो अंदरून-ए-मुल्क अवाम को उन की सलामती के ताल्लुक़ से ख़ौफ़ और अनदेशों में मुब्तिला करते हुए जंग जारी रख सकें।

इस सूरत-ए-हाल में इन के सामने जंग को ख़तम करने का इशारा देने और इस ताल्लुक़ से अफ़्ग़ान सदर हामिद करज़ई के साथ बाज़ाब्ता मुआहिदा करने के इलावा कोई और रास्ता नहीं रह गया था और इस का एहसास ख़ुद सदर अमेरीका को भी था ।

जो मुआहिदा बारक ओबामा और हामिद करज़ई के माबेन हुआ है और जिसकी अब बड़े पैमाने पर तशहीर भी की जा रही है वो दर असल अफ़्ग़ान और अमेरीकी अवाम की तवज्जा हटाने से ज़्यादा अहमियत नहीं रखता । ये बात इस तनाज़ुर में कही जा सकती है कि नाटो की फ़ौजी कार्यवाईयों पर अफ़्ग़ान अवाम की ब्रहमी और नाराज़गी के ताल्लुक़ से दोनों ही सदर ने एक जुमला तक कहने से गुरेज़ किया है ।

ये अमेरीका की हट धर्मी और अफ़्ग़ान हुकूमत की बेबसी और बेचारगी को ज़ाहिर करता है । अब जबकि ये मुआहिदा हो गया है तो दोनों ही सदर को अवाम की ब्रहमी को कम करने में मदद मिलेगी और वो उन की तवज्जा हटाते हुए कुछ देर के लिए राहत की सांस ले सकते हैं।

ताहम ये बात यक़ीन से नहीं कही जा सकती कि इस मुआहिदा के नतीजा में अमेरीका लाज़िमी तौर पर किसी मीना वक़्त पर अफ़्ग़ानिस्तान से अपनी अफ़्वाज को वापस तलब कर लेगा और अफ़्ग़ानिस्तान का इन्ख़िला करते हुए यहां ज़िम्मेदारियां ख़ुद अफ़्ग़ान अवाम और सिक्योरिटी फोर्सेस के हवाले कर दी जाएंगी ।

अपने क़ियाम में तौसीअ के लिए अमेरीका को किसी बहाने की भी ज़रूरत नहीं होगी और अगर ज़रूरत पड़े तो इस के पास बहानों के कमी भी नहीं होंगे । ऐसी सूरत में जो मुआहिदा हुआ है इस पर अमल आवरी के ताल्लुक़ से ज़्यादा तवक़्क़ुआत वाबस्ता नहीं की जा सकतीं।

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