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अफ़्ग़ान तालिबान की पुश्तपनाही नहीं की जा रही है पाकिस्तान

पाकिस्तान अफ़्ग़ानिस्तान के तालिबान की पुश्तपनाही नहीं कर रहा है और ये फैसला करना अफ़्ग़ानिस्तान के अवाम का काम है कि आया तालिबान को मुस्तक़बिल में मुल़्क की हुकूमत का हिस्सा होना चाहीए यह नहीं। वज़ीर-ए-आज़म पाकिस्तान मिस्टर यूसुफ

पाकिस्तान अफ़्ग़ानिस्तान के तालिबान की पुश्तपनाही नहीं कर रहा है और ये फैसला करना अफ़्ग़ानिस्तान के अवाम का काम है कि आया तालिबान को मुस्तक़बिल में मुल़्क की हुकूमत का हिस्सा होना चाहीए यह नहीं। वज़ीर-ए-आज़म पाकिस्तान मिस्टर यूसुफ़ रज़ा गीलानी ने ये बात कही ।

मिस्टर गीलानी ने अलजज़ीरा के साथ एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि ये फैसला करना अफ़्ग़ान अवाम का काम है कि मुस्तक़बिल की हुकूमत में कौन कौन शामिल हूँ और पाकिस्तान उसी हुकूमत की ताईद-ओ-हिमायत करेगा जो अफ़्ग़ानिस्तान के क़ाइदीन की ख़ाहिशात के मुताबिक़ हूँ और अफ़्ग़ान अवाम केलिए हो। बैन अल-अक़वामी सतह पर पैदा होने वाली तशवीश कि पाकिस्तान तालिबान अस्करीयत पसंदों को अफ़्ग़ानिस्तान में दुबारा इक़तिदार हासिल करने की कोशिशों में मदद कर रहा है मिस्टर गीलानी ने कहा कि पाकिस्तान की जानिब से अफ़्ग़ानिस्तान के तालिबान की ताईद नहीं की जा रही है ।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान तालिबान की ताईद क्यों करेगा ? । ये अफ़्ग़ान अवाम का काम है कि वो अपने मुस्तक़बिल के ताल्लुक़ से फैसला करें। पाकिस्तान का रोल यही होगा कि वो वहां अफ़्ग़ान अवाम की हुकूमत क़ायम करने की कोशिशों में मदद फ़राहम करे । उन्हों ने इद्दिआ किया कि पाकिस्तान अफ़्ग़ान मसला के हल का हिस्सा बनेगा अफ़्ग़ान मसला का हिस्सा नहीं बनेगा । उन्हों ने कहा कि एक मुस्तहकम ख़ुदमुख़तार आज़ाद और ख़ुशहाल अफ़्ग़ानिस्तान ख़ुद पाकिस्तान के मुफ़ाद में है ।

अफ़्ग़ानिस्तान के अवाम को अपने मुल़्क की क़िस्मत का फैसला करना चाहीए और पाकिस्तान उन के हर इंतेख़ाब को क़बूल करेगा। उन्हों ने कहा कि नाटो अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की क़ियाम अमन फ़ौज और अमरीका को बिलआख़िर अफ़्ग़ानिस्तान से वापिस होना है लेकिन बहैसियत पड़ोसी हम ( पाकिस्तान ) को सारी ज़िंदगी एक दूसरे के साथ ही रहना है । मग़रिबी ताक़तों ने पाकिस्तान की फ़ौज और एन्टुली जिन्स पर इल्ज़ाम आइद किया कि वो अफ़्ग़ानिस्तान की तालिबान की ताईद कर रहे हैं और हक़्क़ानी नेटवर्क की खासतौर पर ताईद की जा रही है ताकि वो अफ़्ग़ानिस्तान में हिंदूस्तान के बढ़ते हुए असर-ओ-रसूख़ पर क़ाबू पा सके ।

मिस्टर गीलानी ने कहा कि उन्होंने क़ौमी सलामती से मुताल्लिक़ पारलीमानी कमेटी से कहा कि वो अमेरीका और नाटो के साथ नई मस्रूफ़ियत की शराइत तैयार करें की उनका अफ़्ग़ानिस्तान से पाकिस्तान में फ़िज़ाई हमले किए जा रहे हैं और गुज़शता साल के इसी तरह के एक हमले में 24 पाकिस्तानी सिपाही हलाक होगए थे । उन्हों ने कहा कि पारलीमानी कमेटी जो कुछ भी सिफ़ारिशात पेश करेगी उन पर पार्ल्यमंट के मुशतर्का इजलास में ग़ौर किया जाएगा और इसी की बुनियाद पर अमेरीका के साथ मुस्तक़बिल के ताल्लुक़ात कादार-ओ-मदार रहेगा।

एक और सवाल के जवाब में मिस्टर गीलानी ने एतराफ़ किया कि हिंदूस्तान और पाकिस्तान के माबेन कई गलतफहमियां हैं ताहम उन्हों ने कहा कि दोनों ही ममालिक जंगों के मुतहम्मिल नहीं होसकते। उन्हों ने कहा कि दोनों ही मुल्क इस बात को समझते हैं कि दोनों ही न्यूकलीयर ताक़त हैं इस लिए जब वो वज़ीर आज़म बने तो उन्हों ने हिंदूस्तानी वज़ीर आज़म डाक्टर मनमोहन सिंह से दरख़ास्त की थी कि मसाइल को बाहमी तौर पर ग़ौर-ओ-ख़ौज़ किया जाए ।

उन्हों ने कहा कि डाक्टर सिंह एक संजीदा शख़्स हैं और हम ने मसला कश्मीर के बिशमोल हमारे तमाम मसाइल पर ग़ौर-ओ-ख़ौज़ का फैसला करलिया है । इसराईल की जानिब से इरान पर हमलों के अनुदेशों से मुताल्लिक़ सवाल के जवाब में मिस्टर गीलानी ने कहा कि हम सारे इलाक़ा में अमन चाहते हैं।

हम अपनी जगह ठीक हैं और हम नहीं चाहते कि इलाक़ा में अदम इस्तिहकाम पैदा हो । तमाम मसाइल केलिए बात चीत की राह ही इख़तियार की जानी चाहीए ।

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