Wednesday , May 23 2018

आंगन वाड़ी मराकज़ ( केंद्र) के लिए ज़ाती इमारतें

हुकूमत पडुचेरी ने इन तमाम आंगन वाड़ी मराकज़ ( केंद्रों) को जो इंटीग्रेटेड चाइल्ड्स डेवलपमेंट स्कीम के तहत क़ायम किए गए हैं, चलाने के लिए उन की ज़ाती इमारत के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया है। वज़ीर बराए वेलफेयर पी राजा ने ये बात कही।

हुकूमत पडुचेरी ने इन तमाम आंगन वाड़ी मराकज़ ( केंद्रों) को जो इंटीग्रेटेड चाइल्ड्स डेवलपमेंट स्कीम के तहत क़ायम किए गए हैं, चलाने के लिए उन की ज़ाती इमारत के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया है। वज़ीर बराए वेलफेयर पी राजा ने ये बात कही। आंगन वाड़ी सेंटर के लिए एक नई इमारत का ऐलान करते हुए उन्होंने कहा कि इन मराकज़ का मक़सद केजी (KG) से क़बल की उम्र वाले बच्चों की निगहदाश्त ( स‍ंरक्षण/ निगरानी) करना है।

याद रहे कि नई इमारत का इफ़्तिताह पाउनर नगर में किया गया है। यहां इस बात का तज़किरा ज़रूरी है कि किंडरगार्टन (के जी) से क़बल की उम्र वाले बच्चों के इलावा हामिला ( गर्भवती) और दूध पिलाने वाली माओं के लिए ग़िजाईयत से भरपूर खाना फ़राहम करना भी इन मराकज़ के अहम मक़ासिद में शामिल है।

पडुचेरी इंतिज़ामीया मर्कज़ी हुकूमत के आई सी डी एस प्रोग्राम पर दियानतदारी से अमल आवरी कर रहा है क्योंकि ख़वातीन और बच्चों की सेहत को अव्वलीन तर्जीह दी जाती है। इफ़्तिताह के मौक़ा पर वज़ीर बराए मुक़ामी इंतिज़ामी इंजीनीयर सेल्वम ने भी ख़िताब किया। याद रहे कि मुल्क भर में तक़रीबन हर रियासत में ख़वातीन और इतफ़ाल के फ़लाह-ओ-बहबूद प्रोग्राम पर ज़ाइद तवज्जा मर्कूज़ की जाती है क्योंकि अगर माएं तंदरुस्त-ओ-सेहत मंद होंगी तो बच्चे भी सेहत मंद होंगे और अगर बच्चे सेहत मंद होंगे तो मुल्क का मुस्तक़बिल ( भविष्य) भी सेहत मंद होगा क्योंकि आगे चल कर उन ही बच्चों को मुल्क की बागडोर सँभालना है।

मिस्टर सेल्वम के मुताबिक़ बच्चों को अगर इबतदा ही से ग़िजाईयत से भरपूर खाना खिलाया जाए तो उन की नशव-ओ-नुमा बेहतर तौर पर की जा सकती है। इलावा अज़ीं उन्हों ने ये भी कहा कि हामिला ख़वातीन को आराम और अच्छी ग़िज़ा की हमेशा ज़रूरत होती है और इस तरह हमारी कोशिश ये होती है कि माओं को ऐसी ग़िज़ा फ़राहम की जाय जो जल्द हज़म होती हो और पेट में मौजूद बच्चों के लिए भी फ़ायदेमंद हो। किराया की इमारतों में काम करने से हुकूमत का बेशतर सरमाया किरायों में ज़ाए हो जाता है जबकि ज़ाती इमारतों में प्रोग्राम पर अमल आवरी से काफ़ी बचत की जा सकती है।

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