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आंधरा प्रदेश की जमातें 2014 के चुनाव तक तक़सीम को रोकने की ख़ाहां

आंध्र प्रदेश के अवाम अगरचे कम-ओ-बेश इस हक़ीक़त पर अपने आप को तसल्ली दे चुके हैंके अब रियासत की तक़सीम नागुज़ीर होचुकी है लेकिन सीमांध्र में सरगर्म सयासी जमातें कम से कम 2014 के आम चुनाव के इनइक़ाद तक रियासत की तक़सीम के अमल को रोकने के लिए

आंध्र प्रदेश के अवाम अगरचे कम-ओ-बेश इस हक़ीक़त पर अपने आप को तसल्ली दे चुके हैंके अब रियासत की तक़सीम नागुज़ीर होचुकी है लेकिन सीमांध्र में सरगर्म सयासी जमातें कम से कम 2014 के आम चुनाव के इनइक़ाद तक रियासत की तक़सीम के अमल को रोकने के लिए कोई कसर बाक़ी रखना नहीं चाहतीं।

ये सयासी जमातें पिछ्ले 85 दिन से जारी मुत्तहदा आंध्र प्रदेश एजीटेशन की शक्ल में अवाम को ये यक़ीन दिलाना चाहती हैं कि वो रियासत को मुत्तहिद रखने के लिए कोई कसर बाक़ी नहीं रखेंगी।

सीमांध्र के अवाम को हाल ही में इस बात का यक़ीन दिलाने की एक कोशिश के तौर पर चीफ़ मिनिस्टर एन किरण कुमार रेड्डी ने यहां तक कह दिया था कि हम अगरचे तूफ़ान फ़ाईलन को नहीं रोक सके लेकिन यक़ीनन हम ( तक़सीम ) के तूफ़ान को रोकने की भरपूर कोशिश करेंगे।

यहां ये बात भी दिलचस्प हैके इस से दो दिन पहले ही किरण कुमार रेड्डी ने मुख़्तलिफ़ लब-ओ-लहजा इख़तियार किया था और मर्कज़ को मश्वरह दिया था कि वो मुक़र्ररा ज़ाबता की पाबंदी करते हुए रियासत की तक़सीम के अमल पर पेशरफ़त करे जैसा कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और उतरखंड जैसी नई रियास्तों के क़ियाम के मौके पर किया गया था।

मर्कज़ी वुज़रा पनाबाका लक्ष्मी, दगो बाटी पुरंदेस्वारी और जे डी सेलम भी इस मसले पर खुल कर मंज़रे आम पर आगए जिन्होंने कहा कि रियासत की तक़सीम को अब कोई रोक नहीं सकता लेकिन कांग्रेस अरकान-ए-पार्लियामेंट जैसे वे अरूण कुमार और दूसरों अवामी ब्रहमी का असल निशाना बनना पड़ा जो मुसलसिल ये वाअदा कररहे हैं कि 2014 के चुनाव तक कुछ नहीं होगा।

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