आंध्र प्रदेश में सदर राज

आंध्र प्रदेश में सदर राज
आज एक बार फिर से आंध्र प्रदेश में सदर राज लग गया है। मर्कज़ी काबीना ने जुमा को आंध्र प्रदेश में सदर राज नाफ़िज़ करने का फ़ैसला किया था। आंध्र प्रदेश की तक़सीम कर अलग तेलंगाना रियासत की तशकील की बावत पहले ही फ़ैसला किया जा चुका है। जुमा को

आज एक बार फिर से आंध्र प्रदेश में सदर राज लग गया है। मर्कज़ी काबीना ने जुमा को आंध्र प्रदेश में सदर राज नाफ़िज़ करने का फ़ैसला किया था। आंध्र प्रदेश की तक़सीम कर अलग तेलंगाना रियासत की तशकील की बावत पहले ही फ़ैसला किया जा चुका है। जुमा को वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह की रिहायश गाह पर हुई काबीना की मीटिंग में आंध्र असेंबली को आरिज़ी तौर पर तहलील करने का भी फ़ैसला किया गया।

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश के वज़ीर-ए-आला किरण कुमार रेड्डी ने तेलंगाना बिल को मंज़ूर करने की मुख़ालिफ़त करते हुए गुज़िश्ता 19 फरवरी को वज़ीर-ए-आला के ओहदे से इस्तीफ़ा दे दिया था। गवर्नर ने इस्तीफ़ा क़बूल करते हुए उन्हें क़ाइम मक़ाम वज़ीर-ए-आला के तौर पर काम करते रहने की बात की थी। आज एक बार फिर से क़रीब 41 साल बाद आंध्र प्रदेश में सदर राज लग गया है।

इस से पहले , साल 1973 में आंध्र प्रदेश में सदर राज लगाया गया था। उस वक़्त एक अलग रियासत की मांग को लेकर जय आंध्र तहरीक ज़ोरों पर थी। जिस वक़्त साल 1973 में तहरीक जारी थी, उस वक़्त साबिक़ वज़ीर-ए-आज़म पी वी नरसिम्हा राव ने वज़ीर-ए-आला के ओहदे से इस्तीफ़ा दे दिया था . जिस के बाद रियासत में 10 महीनों से ज़्यादा वक़्त तक सदर राज लगा था।

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