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आइन्दा साल के इंतेख़ाबात मुस्तहकम हुकूमत के इंतेख़ाब का मौक़ा

सब्र की भी एक हद होती है, पाकिस्तान को सदर जम्हुरीया हिन्द का पैग़ाम

सब्र की भी एक हद होती है, पाकिस्तान को सदर जम्हुरीया हिन्द का पैग़ाम
मुख़्तलिफ़ महिकमों की कारकर्दगी और हुक्मरानी के बारे में बड़े पैमाने पर फैली हुई मायूसी का तज़किरा करते हुए सदर जम्हुरीया हिन्द ने कहा कि आइन्दा साल के इंतेख़ाबात एक मुस्तहकम हुकूमत के इंतेख़ाब का मौक़ा हैं ताकि सयानत और मआशी तरक़्क़ी को यक़ीनी बनाया जा सके।

67 वीं यौमे आज़ादी तक़रीब के सिलसिले में क़ौम के नाम अपने पैग़ाम में उन्होंने पार्लियामेन्ट और क़ानूनसाज़ असेम्बलीयों की कारकर्दगी के अंदाज़ पर शदीद तशवीश ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि बदउनवानी एक बड़ा चैलेंज बन चुकी है। मौजूदा सियासी सूरत-ए-हाल पर अमलन तबसरा करते हुए प्रण‌ब मुख‌र्जी ने आइन्दा साल के आम इंतेख़ाबात का हवाला दिया और कहा कि जम्हूरीयत का ये अज़ीम तहवार एक मौक़ा है ताकि हम एक मुस्तहकम हुकूमत मुंतख़ब करसकें जो हमारी सयानत और मआशी तरक़्क़ी को यक़ीनी बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि हर इलेक्शन क़ौम के सफ़र में एक अहम संग-ए-मील होना चाहीए क्योंकि ये सफ़र अज़ीम तर समाजी हम आहंगी, अमन और ख़ुशहाली का सफ़र है। जम्हुरीयत ने हमारे मुल्क को एक मौक़ा अता किया है ताकि एक और सुनहरे दौर का आग़ाज़ किया जा सके। उन्होंने पाकिस्तान से कहा कि सब्र की भी हद होती है और तमाम ज़रूरी इक़दामात किए जाऐंगे ताकि दाख़िली सलामती यक़ीनी बनाई जा सके और इलाक़ाई यकजहती का तहफ़्फ़ुज़ किया जा सके।

पाकिस्तान का नाम लिए बगै़र सदर जम्हुरीया प्रण‌ब मुख‌र्जी ने कहा कि हालाँकि हिन्दुस्तान ने पड़ोसीयों से बेहतर ताल्लुक़ात क़ायम करने की हरमुमकिन कोशिश की लेकिन सरहद पर कशीदगी पाई जाती है और ख़ित्ता क़बज़ा पर बार बार जंग बंदी की ख़िलाफ़वरज़ी होरही है जिस के नतीजे में इंसानी जानें ज़ाए होरही हैं। उन्होंने कहा कि सब्र की भी एक हद होती है और मज़ीद ऐसी कार्यवाईयों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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