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आइ एस आइ ने हक़्क़ानी को ओहदा छोड़ने पर मजबूर किया: अमरीकी अख़बार

कराची २५ नवंबर ( एजैंसीज़ ) अमरीकी अख़बार वाल स्टरीट जर्नल ने हुसैन हक़्क़ानी की बेदखली पर पाकिस्तानी फ़ौज और आइ एस आइ पर शदीद तन्क़ीदी रिपोर्ट शाय की है।

कराची २५ नवंबर ( एजैंसीज़ ) अमरीकी अख़बार वाल स्टरीट जर्नल ने हुसैन हक़्क़ानी की बेदखली पर पाकिस्तानी फ़ौज और आइ एस आइ पर शदीद तन्क़ीदी रिपोर्ट शाय की है।

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ हक़्क़ानी की बेदखली अमरीका केलिए ईस्लामाबाद को महिदूद करने का मौक़ा ही। अमरीका मुख़ालिफ़ अवाम के नुमाइंदा सफ़ीर ने खुल कर अपने आप को मुवाफ़िक़ अमरीका साबित किया।अख़बार के मुताबिक़ आई ऐस आई की तरफ़ से हक़्क़ानी को ओहदा छोड़ने पर मजबूर किया गया।

मेमो गेट तनाज़ा ने आम पाकिस्तानीयों के नज़दीक हक़्क़ानी को ग़द्दार बना दिया। अमरीकी अख़बार के मुताबिक़ करिश्माती सफ़ीर की अचानक रुख़्सती ने वाशिंगटन केलिए ईस्लामाबाद को महिदूद करने का मौक़ा फ़राहम क्या, ये कोई मामूली बात नहीं कि किसी सफ़ीर की रुख़्सती आलमी मीडीया में शहि सुर्खियां पाई। हुसैन हक़्क़ानी ने सफ़ीर के तौर पर तीन साल से ज़्यादा अर्से तक ख़िदमात अंजाम दें।

वो रिवायती सफ़ीरों से मुख़्तलिफ़ साबित हुई, दुनिया में सब से ज़्यादा अमरीका मुख़ालिफ़ मुक़ामात में से एक की नुमाइंदगी करते हुए उन्हों ने खुल करअपने आप को मुवाफ़िक़ अमरीकी साबित किया। अख़बार के मुताबिक़ हक़्क़ानी की रवानगी के ग़ैरमामूली हालात पाकिस्तान की नाज़ुक और बे यक़ीनी सियासत का मज़हर हैं, उन्हें ओहदा छोड़ने पर मजबूर किया गया।

अख़बार के मुताबिक़ खु़फ़ीया तौर पर फ़ौज की गिरिफ़त को कमज़ोर करने केलिए अमरीकी मुआवनत की दरख़ास्त के ग़ैर मुसद्दिक़ा इल्ज़ामात पर पाकिस्तान की खु़फ़ीया एजैंसी आई आईस आई की तरफ़ से हुसैन हक़्क़ानी पर इस्तीफ़ा देने का दबाव् था, हक़्क़ानी का ओहदा छोड़ना वाज़िह करता है कि पाकिस्तानी फ़ौज , सियोल हुकूमत और इस के जमहूरी उसूल को क़बूल करने का इरादा नहीं रखती जिस की वजह से अमरीकी पालिसी साज़ों को पाकिस्तान से ताल्लुक़ात पर नज़र-ए-सानी करना चाहिए ।

अख़बार के मुताबिक़ मेमो गेट स्कैंडल की तमाम सूरत-ए-हाल, साज़िश में हक़्क़ानी के मुलव्वस होने के किसी ठोस सबूत की अदमे मौजूदगी के बावजूद, माईक मोलन का इस पर कोई तवज्जा ना देना और गुज़शता हफ़्ते मेमो का शाय होना बहुत से पाकिस्तानीयों को यक़ीन दिलाता है कि हक़्क़ानी अपने मुल्क् के ग़द्दार हैं।

कुछ पाकिस्तानी हुक्काम फ़ौज की मुज़ाहमत और वाशिंगटन के साथ दोस्ती बरक़रार रखने के हक़ में हैं। अमरीका केलिए पाकिस्तान को नज़रअंदाज करना आसान नहीं है |

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