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आईएस और अलकायदा के लिए दो हिंदुस्तानी का जद्दो जहद

तंज़ीम आईएसआईएस और अलकायदा के लिए हिंदुस्तानी नौजवानों की जयपुर और हैदराबाद में भर्ती करने की कोशिशों की जांच में नए खुलासे सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि हिंदुस्तानी नस्ल के दो लोग इंटरनेट पर नौजवानों को लालच दे रहे हैं और

तंज़ीम आईएसआईएस और अलकायदा के लिए हिंदुस्तानी नौजवानों की जयपुर और हैदराबाद में भर्ती करने की कोशिशों की जांच में नए खुलासे सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि हिंदुस्तानी नस्ल के दो लोग इंटरनेट पर नौजवानों को लालच दे रहे हैं और आईएसआईएस व अल कायदा के लिए भर्ती कर रहे हैं। इन दोनों में राबिता भी है।

एक अंग्रेजी रोज़नामे की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह सामने आया है कि अलकायदा के लिए भर्ती करने वाला भटकल इलाके से जुडा अब्दुल कादिर सुल्तान अरमार नाम का शख्स है। उसके बारे में माना जाता है कि इन दिनों उसका ठिकाना अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सरहदों पर है और वह अंसारूल तौहीदुल हिंद नाम के तंज़ीम से जुडा है।

अरमार ने ही “ग्लोबल जिहाद” में शामिल होने के लिए हिंदुस्तानी मुसलमानों से हाल ही में अंसारूल तौहीद के ऑनलाइन वीडियो में अपील की थी। अरमार हिंदुस्तान में वॉन्टेड है और उसके खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी हुआ है। यह नोटिस उसके और इंडियन मुजाहिदीन के दिगर मेम्बरों के खिलाफ कौमी जांच एजेंसी (एनआईए )की तरफ से एक बडे दहशगर्दाना साजिश के ताल्लुक में मामला दर्ज किए जाने के बाद जारी की गई थी। उसके अलावा, कर्नाटक के रहने वाले सिमी के साबिक मेम्बर की पहचान आईएसआईएस के लिए भर्ती करने वाले के तौर पर हुई है।

उसके बारे में बताया जाता है कि वह इन दिनों खाडी ममालिक में कहीं छिपा हुआ है। उसने ही हाल के दिनों में इंटरनेट की मदद से हैदराबाद के चार नौजवानो की भर्ती करने की कोशिश किया था। ज़राये ने बताया कि मालूम चला है कि वह हिंदुस्तान के कई नौजवानो के साथ ऑनलाइन राबिते में है। लेकिन, हिंदुस्तान में हाल के किसी मामले में उसका नाम नहीं आया है।

ज़राये ने बताया कि कुल अदम तंज़ीम सिमी के कर्नाटक में सरगर्मियों की जांच के मामले में 2007 में उसका नाम उछला था, लेकिन अब तक उसके खिलाफ कोई मामला नहीं दर्ज किया गया है।

दहशरगर्दो की भर्ती में हिंदुस्तानी नस्ल के दो लोगों के शामिल होने की तस्दीक दहशतगर्दाना सरगर्मियों की निगरानी में लगी कई जांच एजेंसियों ने की है। कर्नाटक के एक सीनीयर पुलिस आफीसर ने बताया, आईएस के लिए हैदराबाद में भर्तियों की जांच में पहले सिमी से ताल्लुक रखने वाले कर्नाटक के साकिन का नाम आना फिक्र का मौज़ू है। इसकी जांच की जा रही है। हैदराबाद मामले में करीब 20 साल के चार नौजवानों को मगरिबी बंगाल में हिरासत में लिया गया था।

वे आईएसआईएस में शामिल होने के लिए हिंदुस्तान से बाहर जाने की फिराक में थे। ये चारों नौजवान इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स थे।
जांच आफीसरों ने बताया कि हैदराबाद के चारों नौजवानों से कर्नाटक के साकिन के (साबिक सिमी) कारकुन ने ऑनलाइन राबिता किया था। आफीसरों के मुताबिक, हैदराबाद के छह नौजवानों से पहले ऑनलाइन राबिता किया गया और फिर आईएसआईएस में भर्ती के लिए उनका ब्रेनवॉश किया गया था।

ज़राये ने बताया कि इस्तांबुल के रास्ते इराक ले जाने के लिए उनके वीजा का इंतेज़ाम किया जाना था। दो नौजवानों ने मुबय्यना तौर पर अपने वालिदैन को उनके मंसूबे के बारे में पता चलने पर इरादा तोड दिया था। उसके बाद तुर्की के रास्ते उन नौजवानो के वीजा का इंतेज़ाम करने वाला एक शख्स अपने वादे से मुकर गया, जिससे बाकी बचे चार नौजवान भी डर गए।

ज़राये के मुताबिक, उसके बाद चारों नौजवान तेलंगाना के करीम नगर में जाकर छिप गए और आईएसआईएस के लिए भर्ती करने वाले से राबिता करके पूछा कि क्या करना है। कर्नाटक के रहने वाले सिमी के साबिक मेम्बर ने मुबय्यना तौर पर उनको अरमार के राबिते में रहने को कहा। आफीसरों ने बताया कि चारों नौजवान ने अरमार से स्काइप की मदद से बात की। आमतौर पर अंसारूल तौहीद के वीडियो में मुखौटा पहनकर नजर आने वाला अरमार उनसे बातचीत के दौरान स्काइप पर बगैर मास्क के नजर आया।

अरमार ने मुबय्यना तौर पर चारों हैदराबादी नौजवानों को मगरिबी बंगाल चले जाने को कहा। उसने उन लोगों को तयक्कुन दिया कि उनको उसके साथी पहले ढाका ले जाएंगे, फिर वहां से आगे ले जाएंगे। लेकिन इससे पहले कि चारों नौजवान सरहद पार करके बांग्लादेश जाते उनको मगरिबी बंगाल के मालदा इलाके में हैदराबाद पुलिस ने पकड लिया। उनको वापस हैदराबाद लाया गया और उनके पैरंट्स के हवाले कर दिया गया।

उन नौजवानो के खिलाफ कोई मामला नहीं दर्ज किया गया था और उनके नामों को आवामी भी नहीं किया गया था। पुलिस ने ऐसा इसलिए किया था ताकि उनके खानदान के लोगों को यह भरोसा दिलाया जा सके कि नौजवानो को जिहाद के लिए भर्ती करने वाले लोगों ने गुमराह किया था।

जयपुर मामले में तीन नौजवान शामिल थे। उनमें से दो जयपुर के साकिन हैं और दोनों ही इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स हैं। उनके नाम मोहम्मद महरूफ और मोहम्मद वकार अजहर उर्फ हनीफ हैं। तीसरे का नाम शाकिब अंसारी उर्फ खालिद है। वह जोधपुर का रहने वाला है और डीटीपी बिजनस ऑपरेटर है।

उसको दहशतगर्दाना सरगर्मियों में मुलव्वस होने के इल्ज़ाम में 23 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। तीनों नौजवानों को मुबय्यना तौर पर इंडियन मुजाहिदीन के कारकुन तहसीन अख्तर उर्फ मोनू के राबिते में रहने को कहा गया था। अख्तर की गिरफ्तारी के बाद ही जांच एजेंसियों को उसका सुराग लगा था। इन तीनों की गिरफ्तारी के बाद हुई जांच में सामने आया कि उन लोगों को जिहाद कि लिए सुल्तान अरमार ने लालच दिया था। अरमार ने उन लोगों से पहले जाली पहचान की मदद से फेसबुक पर उनसे राबिया कायम किया था।

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