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आई एस आई का हिंदूस्तान से ज़्यादा अमरीका दुशमन

पाकिस्तान की ताक़तवर तरीन खु़फ़ीया एजेंसी आई एस आई अमरीका को अपना बदतरीन दुश्मन तसव्वुर करती है और दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ वाशिंगटन से ईस्लामाबाद का तआवुन-ओ-इश्तिराक सिर्फ़ फ़र्ज़ी और बनावटी है जिस का मक़सद अमरीका से बतौर इमदाद

पाकिस्तान की ताक़तवर तरीन खु़फ़ीया एजेंसी आई एस आई अमरीका को अपना बदतरीन दुश्मन तसव्वुर करती है और दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ वाशिंगटन से ईस्लामाबाद का तआवुन-ओ-इश्तिराक सिर्फ़ फ़र्ज़ी और बनावटी है जिस का मक़सद अमरीका से बतौर इमदाद अरबों डॉलर्स हासिल करना है।

इस बात का इन्किशाफ़ अलक़ायदा सरबराह उसामा बिन लादन के खु़फ़ीया ठिकाने तक पहुंचाने और उन को क़तल करवाने में अमरीकी खु़फ़ीया एजेंसी सी आई ए की मदद करने वाले डाक्टर शकील आफ़रीदी ने किया है। फॉक्स न्यूज़ को दिए गए अपने ख़ुसूसी इंटरव्यू में शकील आफ़रीदी ने कहा कि उसे गिरफ़्तारी के बाद से मुसलसल अज़ीयतें दी जा रही हैं

और आज उस की जो भी हालत हुई है सी आई ए को उसामा की ऐबट आबाद क़ियामगाह तक पहुंचाने में मदद करने का नतीजा है। शकील आफ़रीदी का ये भी कहना है के आई एसआई ओहदेदारों के ख़्याल में अमरीका पाकिस्तान और आई एस आई का हिंदूस्तान से भी ज़्यादा बदतरीन दुश्मन है।

वाज़ेह रहे कि डाक्टर शकील आफ़रीदी ने ऐबट आबाद इलाक़ामें टीका अंदाज़ी का एक फ़र्ज़ी प्रोग्राम चलाने में सैंटर्ल इनोसटी गैशन ब्यूरो की मदद की थी, जिस के ज़रीया कहा जाता है के उसामा के बच्चों के डी एन ए नमूने हासिल करने की कोशिश की गई। शकील आफ़रीदी की ग़द्दारी और फिर अमरीकी तजुर्बा के ख़ुसूसी कमांडोज़ की कार्रवाई को पाकिस्तानी हुक्काम ने मुल्क के इक़तिदार-ए-आला की ख़िलाफ़वरज़ी क़रार दिया था।

इस धावे के बाद डाक्टर शकील आफ़रीदी को पाकिस्तानी हुक्काम ने मुल्क के ख़िलाफ़ साज़िशी-ओ-ग़द्दारी के इल्ज़ाम में हिरासत में लेकर पूछताछ की और गुज़शता माह उसे इस जुर्म के लिए 33 साल की सज़ाए क़ैद सुनाई गई।

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