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आई टी क़ानून के ग़लत इस्तेमाल को रोकने मर्कज़ की हिदायात जारी

सोशल नेटवर्किंग साईटस पर तबसेरा करने वाले बाज़ अफ़राद की गिरफ़्तारी के पस-ए-मंज़र में वज़ीर टेलीकॉम-ओ-इन्फ़ार्मेशन टैक्नोलोजी कपिल सिब्बल ने आज कहा कि इन्फ़ार्मेशन टैक्नोलोजी क़ानून की एक दिफ़ा का बाज़ रियास्तों में ग़लत इस्तेमाल

सोशल नेटवर्किंग साईटस पर तबसेरा करने वाले बाज़ अफ़राद की गिरफ़्तारी के पस-ए-मंज़र में वज़ीर टेलीकॉम-ओ-इन्फ़ार्मेशन टैक्नोलोजी कपिल सिब्बल ने आज कहा कि इन्फ़ार्मेशन टैक्नोलोजी क़ानून की एक दिफ़ा का बाज़ रियास्तों में ग़लत इस्तेमाल किया जा रहा है और मर्कज़ी हुकूमत उसको रोकने केलिए बहुत जल्द एक मुशावरती नोट और ज़रूरी हिदायात जारी करेगी।

सिब्बल ने राज्य सभा में मुख़्तलिफ़ सवालों का जवाब दिया कि हमारे तख़मीना के मुताबिक़ (आई टी क़ानून की दफ़ा 66 ए) के बाज़ रियास्तों में ग़लत इस्तेमाल किया जा रहे है। ये मर्कज़ी हुकूमत और ख़ुद मेरा शख़्सी नज़रिया भी है कि इसका (बेजा) इस्तेमाल दुरुस्त नहीं है।

में उम्मीद करता हूँ बाजलत मुम्किना हम एक मुशावरती नोट जारी करेंगे। ताहम उन्होंने कहा कि ग़लत इस्तेमाल बहुत ज़्यादा नहीं है। सिब्बल इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क़ानून नाफ़िज़ करने वाले इदारों की तरफ‌ से दफ़ा 66 ए का बेजा इस्तेमाल किया जा रहा है और अगर एसा है तो इस्तेमाल बेजा को रोकने केलिए हुकूमत क्या इक़दामात कररही है।

वाज़िह रहे कि नवंबर में शिवसेना के सरबराह बाल ठाकरे की मौत के बाद मुंबई में बंद जैसी सूरत-ए-हाल पर फेसबुक पर किए जाने वाले तबसरों के बाद दो लड़कीयों को गिरफ़्तार किया गया था जिस पर सारे मुल्क में ज़बरदस्त हंगामा आराई हुई थी। अलावा अज़ीं एक लड़के को भी गिरफ़्तार किया गया था, जिसमें कट उन इसके सरबराह राज ठाकरे और महाराष्ट्रा के अवाम के ख़िलाफ़ एक सोशल नेटवर्किंग साईट पर अहानत आमेज़ तबसेरा और फ़हश कलामी की थी।

इस क़ानून की दिफ़ा 66 ए के तहत इलैक्ट्रॉनिक मेल के ज़रीये इंतिहाई जारिहाना, फ़हश, अहानत आमेज़, ख़तरनाक या दिलाज़ार पैग़ामात भेजने वालों को 3 साल तक सज़ा-ए-की गुंजाइश फ़राहम की गई है। सिब्बल ने कहा कि इस मसले पर पुलिस और क़ानून नाफ़िज़ करने वाले दीगर इदारों को मुनासिब मालूमात फ़राहम करने की ज़रूरत है।

उन्होंने कहा कि बैन-उल-अक़वामी रिवाज और बेहतरीन तजुर्बात पर ये क़ानून मबनी है और मुख़्तलिफ़ ममालिक के मुवासलाती क़वानीन में 66 ए जैसी दफ़आत शामिल हैं और ये दफ़आत आज़ादी इज़हार-ए-ख़्याल और इंसानी हुक़ूक़ की मताबात में हैं जिसकी दस्तूर की दफ़आत 19 और 21 में ज़मानत दी गई है।

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