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आई टी क़ानून से आज़ादी इज़हार-ए-ख़्याल सल्ब नहीं हुई, अदालत में मर्कज़ का बयान

नई दिल्ली, 12 जनवरी ( पी टी आई) मर्कज़ ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि साइबर क़वानीन की इन मुतनाज़ा दफ़आत में जिनके तहत महाराष्ट्रा की दो लड़कीयों को अपने तब्सिरे फेसबुक पर पोस्ट करने पर गिरफ़्तार किया गया था दरअसल हक़ इज़हार-ए-ख़्याल को सल

नई दिल्ली, 12 जनवरी ( पी टी आई) मर्कज़ ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि साइबर क़वानीन की इन मुतनाज़ा दफ़आत में जिनके तहत महाराष्ट्रा की दो लड़कीयों को अपने तब्सिरे फेसबुक पर पोस्ट करने पर गिरफ़्तार किया गया था दरअसल हक़ इज़हार-ए-ख़्याल को सल्ब करने से मुताल्लिक़ नहीं है और हुक्काम की मुबय्यना ज़बरदस्ती का हरगिज़ ये मतलब नहीं हो सकता कि ये क़ानून ग़लत है ।

हुकूमत महाराष्ट्रा ने जिससे इस मसला पर वज़ाहत तलब की गई थी कहा कि ज़िला थाने ने दो लड़कीयों को शिवसेना के सरबराह बाल ठाकरे की अर्थी के जुलूस के मौक़ा पर मुंबई बंद के बारे में तब्सिरे किए जाने पर गिरफ़्तार किया गया था । इन दोनों लड़कीयों की फ़ौरी तौर पर गिरफ़्तारी गै़रज़रूरी और उजलत पसंदी पर मबनी थी जिसको हक़बजानिब क़रार नहीं दिया जा सकता ।

हुकूमत ने मज़ीद कहा कि ज़ाबता फ़ौजदारी की दफ़आत 41और 41 (अलिफ़/ अ) के तहत फ़ौरी गिरफ़्तारी दरकार नहीं होती । मुल्ज़िमीन की गिरफ़्तारी जल्दबाज़ी पर मबनी थी जिसको हक़बजानिब क़रार नहीं दिया जा सकता । इसके साथ दोनों लड़कीयों ने किसी ग़लत इरादों के तहत अपने तब्सिरे पोस्ट नहीं किए थे ।

वज़ारत-ए-मवासलात-ओ-इन्फ़ार्मेशन टेक्नोलाजी ने अपने हलफ़नामा में इन्फ़ार्मेशन टेक्नोलाजी क़ानून की दफ़ा 66(अलिफ़) की मुदाफ़अत की है । जिसके तहत दोनों लड़कीयों को थाना पुलिस ने बालगढ़ से गिरफ़्तार किया था । ताहम कहा कि बाअज़ ओहदेदारों की ज़बरदस्ती या ज़्यादती का मतलब हरगिज़ ये नहीं हो सकता कि इस क़ानून की दिफ़ा 66 ( अलिफ़) कोई बुरा क़ानून है।

हुकूमत ने मज़ीद कहा कि क़ानून की इस दफ़ा ने इज़हार-ए-ख़्याल की आज़ादी को पामाल नहीं किया है और जिसकी ज़मानत दस्तूर की दफ़ा 19(1)दी गई है । क्योंकि इस क़ानून के तहत क़तई आज़ादी नहीं दी गई है बल्कि इसके साथ चंद वाजिबी पाबंदीयां भी आइद है । हुकूमत महाराष्ट्रा ने मज़ीद कहा कि वो इन मज़कूरा बाला हालात में पूरे एहतिराम के साथ ये एतराफ़ करती है कि हुकूमत महाराष्ट्रा ने इस सारे वाक़िया का संजीदा नोट लिया है जिसमें शाहीन धाडा और रेनू सरीनिवासन को गिरफ़्तार किया गया था ।ये दोनों गिरफ्तारियां बलकीया तौर पर ग़ैर ज़रूरी थी।

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