‘आउटलुक’ की RSS पर रिपोर्ट से मचा बवाल, रिपोर्टर-प्रकाशक-संपादक के खिलाफ FIR दर्ज

‘आउटलुक’ की RSS पर  रिपोर्ट से  मचा बवाल, रिपोर्टर-प्रकाशक-संपादक के खिलाफ FIR दर्ज

आदिवासी लड़कियों की तस्करी को लेकर अंग्रेजी मैगजीन आउटलुक ने अपने ताजा अंक में एक कवर स्टोरी प्रकाशित की, जिसका शीर्षक है ‘ऑपरेशन बेबी लिफ्ट’। यह सर्च स्टोरी फ्रीलांस जर्नलिस्ट नेहा दीक्षित ने की है, जिसमें बताया गया है कि रष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन किस तरह आदिवासी लड़कियों की तस्‍करी करने में संलिप्‍त हैं और उन्‍होंने तीन साल तक की छोटी बच्चियों समेत कुल 31 आदिवासी लड़कियों को असम से उठाकर पंजाब और गुजरात में भेजा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इन संगठनों ने ऐसा करते हुए मानव तस्‍करी से जुड़े राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय कानूनों का जमकर उल्‍लंघन किया है जिसमें गुजरात और पंजाब सरकार की शह शामिल है।

पिछले तीन महीने के अथक प्रयास के बाद पत्रकार नेहा दीक्षित ने 11,300 से भी ज्यादा शब्दों में अपनी ये रिपोर्ट पेश की है। लेकिन रिपोर्ट पब्लिश होने के बाद से महिला पत्रकार नेहा सोशल मीडिया पर उत्पीड़न का शिकार बन गईं। उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां दी जाने लगीं है। इतना ही नहीं नेहा के खिलाफ गुवाहटी के लतासिल पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। एफआईआर में मैगजीन के प्रकाशक इंद्रानिल रॉय और संपादक कृष्ण प्रसाद का नाम भी शामिल है।

इन तीनों के खिलाफ जिन लोगों ने शिकायत की है, उनमें बिजन महाजन, मोमिनुल अव्वल और सुभाष चंद्र कायल शामिल हैं। उन्होंने प्रकाशक, संपादक और रिपोर्टर पर सांप्रदायिक घृणा फैलाने का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि महाजन और अव्वल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य हैं।

राष्ट्रीय सेविका समिति द्वारा जारी एक रिलीज समाचार एजेंसी को मिली है, जिसमें कहा गया है कि गुमराह करने के वाले इन दावों को लेकर आउटलुक माफी मांगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महिला विंग ने अपनी विज्ञप्ति मे कहा कि उसके मार्गदर्शन में चलने वाले सभी छात्रावासों की कार्यवाही कानून के दायरे और निगरानी में है।

वहीं रविवार 7 अगस्‍त को करीब सौ से ज्‍यादा लेखकों, बुद्धिजीवियों और पत्रकारों ने पत्रकार नेहा दीक्षित और आउटलुक पर आरएसएस के हमले की निंदा की है और उनके खिलाफ एक बयान जारी किया है, जिसमें इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताते हुए पुलिस केस वापस लेने की मांग उठाई है।

जारी किए गए इस बयान पर वरिष्‍ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन, ओम थानवी, अक्षय मुकुल, अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह, शबनम हाशमी, हर्ष मंदर, कविता कृष्‍णन, कविता श्रीवास्‍तव समेत तमाम पत्रकारों और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं के दस्‍तखत हैं।
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बयान में कहा गया है, ‘मानव तस्‍करी की जांच शुरू करने के बजाय पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ की गई भ्रामक शिकायत पर कार्रवाई करने की है जिन्‍होंने इस अपराध को शुरू किया है। जारी बयान में ये मांग की गई है कि पुलिस उन लोगों के खिलाफ तत्‍काल आरोप दाखिल करे जो बाल तस्‍करी में संलिप्‍त हैं।

हमने इन आरोपों को लेकर आउटलुक के प्रकाशक इंद्रनील रॉय से जब उनकी राय जाननी चाही तो उन्होंने इस विषय पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया, जबकि संपादक कृष्ण प्रसाद से भी कई बार संपर्क किया गया, पर उनकी ओर से भी कोई जवाब नहीं मिल सका। वहीं नेहा दीक्षित ने भी इस पर बात करने से इनकार कर दिया।

बता दें कि नेहा दीक्षित की शादी फिल्म निर्माता नकुल सिंह साहनी से हुई है, जिन्होंने ‘मुजफ्फरनगर अभी बाकी है’ नाम से एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है, जो काफी विवादों में रही थी।

सैफ अहमद खान ,samachar4media
साभार -samachar4media

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