Saturday , September 22 2018

आखिरी जमाने का सबसे बड़ा फितना

(मौलाना मोहम्मद यूसुफ) हजरत अब्दुल्लाह इब्ने मसूद (रजि0) नबी करीम (स०अ०व०) का इरशाद नकल करते हैं कि इस उम्मत में खास किस्म के चार फितने होंगे उनमें आखिरी और सबसे बड़ा फितना राग व रंग और गाना-बजाना होगा।

(मौलाना मोहम्मद यूसुफ) हजरत अब्दुल्लाह इब्ने मसूद (रजि0) नबी करीम (स०अ०व०) का इरशाद नकल करते हैं कि इस उम्मत में खास किस्म के चार फितने होंगे उनमें आखिरी और सबसे बड़ा फितना राग व रंग और गाना-बजाना होगा।

इस हदीस में अल्लाह के रसूल (स०अ०व०) ने चार फितनों का जिक्र किया है। इससे मुराद खास किस्म के और बड़े-बड़े फितने हैं। आप ने इन चार में से इस हदीस में सिर्फ एक आखिरी फितने का जिक्र फरमाया है। हजरत इमरान बिन हसीन (रजि0) से एक हदीस में आया है कि नबी करीम (स०अ०व०) ने फरमाया कि चार फितने होंगे- पहले में (लोगों का) खून हलाल कर लिया जाएगा, दूसरे में खून और माल हलाल कर लिया जाएगा और तीसरे में खून, माल और शर्मगाहे हलाल कर ली जाएंगी।

नईम बिन हमाद ने हजरत अबू हुरैरा (रजि0) की रिवायत से नबी करीम (स०अ०व०) से यही बात नकल की है और उसमें चैथे फितने का भी जिक्र है कि वह अंधा बहरा और सबको घेर लेने वाला होगा। इससे इन फितनों की एक दर्जा में तअय्युन हो गई जो पहली हदीस में मजकूर नहीं है। फिर फरमाया कि आखिरी फितना फना और तबाही का होगा। इस आखिरी फितने से मुराद दज्जाल का फितना है।

नईम बिन हमाद ने हजरत इमरान की हदीस में चैथे फितने में दज्जाल का इजाफा भी किया है। कुछ हदीस में इस चैथे फितने के बारे में एक दूसरी बात आई है वह यह कि हजरत अबू हुरैरा (रजि0) से मरवी है कि नबी करीम (स०अ०व०) ने फरमाया कि मेरे बाद चार फितने होंगे।

चौथा फितना बड़ा सख्त अंधा और सब पर हावी होने वाला फितना होगा जिसमें उम्मत आजमाइश की वजह से इस तरह रगड़ी जाएगी जैसे चमड़ा रगड़ा जाता है। यहां तक कि इस जमाने में मारूफ को मुंकर और मुंकर को मारूफ समझा जाएगा और उनके दिल मर जाएंगे जिस तरह उनके बदन मर जाते हैं।

इस हदीस में आखिरी फितना राग व रंग और गाना बजाना होगा फरमाया है मगर अबू दाऊद के मुख्तलिफ नुस्खों और इब्ने अबी शीबा और नईम की अल फितन सब में यह लफ्ज अलफना ही आया है और शिराह अबी दाऊद में से साहब औन अल माबूद ने और साहब बजल अल मजहूद ने भी ‘अलफना’ ही के अल्फाज अख्तियार फरमाए हैं और इसी पर शरह भी की है इसलिए गालिबन यहां अलफना लिखना मुसन्निफ का सहू है।

—–बशुक्रिया: जदीद मरकज़

TOPPOPULARRECENT