Friday , December 15 2017

आज़मीने हज के क़ियाम का मसअला अब तक तात्तुल का शिकार

मक्का मुकर्रमा में हैदराबादी रबात में आंध्र प्रदेश के आज़मीने हज के क़ियाम का मसअला अभी भी तात्तुल का शिकार है जिस के बाइस आज़मीन में तशवीश पाई जाती है। सेंट्रल हज कमेटी और नाज़िर रबात के दरमयान आज़मीने हज के इंतिख़ाब के बारे में

मक्का मुकर्रमा में हैदराबादी रबात में आंध्र प्रदेश के आज़मीने हज के क़ियाम का मसअला अभी भी तात्तुल का शिकार है जिस के बाइस आज़मीन में तशवीश पाई जाती है। सेंट्रल हज कमेटी और नाज़िर रबात के दरमयान आज़मीने हज के इंतिख़ाब के बारे में जारी कश्मकश ने सूरते हाल को संगीन मोड़ दे दिया है।

हुकूमत सऊदी अरब की जानिब से नाज़िर रबात हुसैन शरीफ़ के हक़ में मौक़िफ़ इख़्तियार करने के बाइस सेंट्रल हज कमेटी को मसअले की यकसूई में दुशवारीयों का सामना है।

अब जबकि 25 सितंबर से आज़मीने हज की परवाज़ों का आग़ाज़ हो जाएगा, अगर अंदरून दस यौम हैदराबादी रबात में क़ियाम के मसअले की यकसूई नहीं की गई तो आंध्र प्रदेश के आज़मीन रबात में क़ियाम के बाद हज कमेटी की जानिब से मिलने वाली रक़म से महरूम हो जाएंगे।

इस मसअले की यकसूई के सिलसिले में सेंट्रल हज कमेटी से नुमाइंदगी के लिए एग्ज़ीक्यूटिव ऑफीसर स्टेट हज कमेटी एम ए हमीद मुंबई रवाना हुए। उन्हों ने बताया कि वो रबात में आज़मीन के क़ियाम और हज कैंप के इनेक़ाद जैसे मसाइल की यकसूई के लिए सेंट्रल हज कमेटी के हुक्काम से नुमाइंदगी करेंगे।

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