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आज़मीन-ए-हज के लिए सहुलतें बेहतर बनाने हुकूमत-ए-हिंद का तैक़ून

हुकूमत ने आज तैक़ून दिया कि आज़मीन-ए-हज की सहूलतों को नुमायां तौर पर बेहतर बनाया जाएगा और सऊदी अरब से दरख़ास्त की जाएगी कि सालाना आज़मीन-ए-हज्ज के हिन्दुस्तानी कोटा में 20% तख़फ़ीफ़ से दसतबरदारी इख़तियार करली जाये। ये तस्लीम करते हुए कि

हुकूमत ने आज तैक़ून दिया कि आज़मीन-ए-हज की सहूलतों को नुमायां तौर पर बेहतर बनाया जाएगा और सऊदी अरब से दरख़ास्त की जाएगी कि सालाना आज़मीन-ए-हज्ज के हिन्दुस्तानी कोटा में 20% तख़फ़ीफ़ से दसतबरदारी इख़तियार करली जाये। ये तस्लीम करते हुए कि आज़मीन-ए-हज के लिए इंतेज़ामात में कोताहियों हैं, वज़ीर-ए‍-ख़ारिजा सुषमा स्वराज ने एय‌र इंडिया पर भी तन्क़ीद की जो आज़मीन-ए-हज के लिए टिकट की क़ीमत श्रीनगर से रवाना होने वालों के लिए एक लाख 50 हज़ार रुपये वसूल कररहा है जबकि जो लोग दीगर मुक़ामात से हज के लिए रवाना होते हैं, उनके टिकट की क़ीमत तक़रीबन 62,800 रुपये है।

कुल हिंद सालाना कान्फ्रेंस बराए हज से ख़िताब करते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि आज़मीन-ए-हज के क़ियाम का मसला एक बड़ा मसला है और इस मसले के हल के लिए तवील मुद्दत से ग़ौर किया जा रहा है। उन्होंने इशारा दिया कि हुकूमत हिन्दुस्तानी आज़मीन-ए-हज को मक्का मुअज़्ज़मा और पड़ोसी इलाक़ों में सरकारी क़ियाम गाहों का इंतेज़ाम करेगी।

उन्होंने सवाल किया कि क्या इस इलाक़े में चंद इमारतें तामीर की जा सकती हैं, इस सिलसिले में सऊदी अरब की हुकूमत से तआवुन तलब किया जाएगा। ये इमारतें आज़मीन-ए-हज तीन माह तक इस्तेमाल करसकेंगे। बाक़ी 9 माह मातमरीन और ज़ाइरीन यहां क़ियाम करसकेंगे।

वज़ीर-ए‍-ख़ारिजा ने कहा कि मक्का मुअज़्ज़मा में आज़ादी से पहले हिन्दुस्तानी जायदादें थीं और हुकूमत दरयाफ़त करेगी कि इन जायदादों का क्या हुआ, उन्होंने कहा कि उनके इल्म के मुताबिक़ कसीर तादाद में हिन्दुस्तानी जायदादें आज़ादी से पहले मक्का मुअज़्ज़मा और मदीना मुनव्वरा में मौजूद थीं, लेकिन आज नहीं है, इस लिए हाजियों के लिए वक़्फ़ इन जायदादों का क्या हुआ, इस के बारे में दरयाफ़त करना ज़रूरी है।

मर्कज़ी हुकूमत इस बारे में तहक़ीक़ात करेगी। उन्होंने कहा कि जो कंट्टरएक्टर्स मुआहिदे की ख़िलाफ़वरज़ी करें या आज़मीन-ए-हज को ख़िदमात फ़राहम करने में लापरवाही बरतें, उन्हें ब्लैकलिस्ट करदेना चाहिए और उनसे इमारतें वापिस हासिल कर लेनी चाहिए। गुज़श्ता साल हिन्दुस्तानी आज़मीन-ए-हज का कोटा एक लाख 70 हज़ार था जिसे जारीया साल एक लाख 16 हज़ार कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि इस मसले पर भी हुकूमत-ए-सऊदी अरब से रब्त पैदा किया जाएगा। वज़ीर-ए-ख़ारिजा ने कहा कि अक्सर आज़मीन-ए-हज को हज परवाज़ों की ताख़ीर या मंसूख़ होने से मुश्किलात का सामना करना पड़ता है, उन्होंने एय‌र इंडिया को हिदायत दी कि तमाम 12 शहरों के लिए अपनी ख़िदमात बेहतर बनाए।

उन्होंने कहा कि गुज़िश्ता साल एय‌र इंडिया ने एक टिकट के लिए श्रीनगर के आज़मीन-ए-हज्ज से एक लाख 54 हज़ार रुपये और दीगर मुक़ामात के आज़मीन-ए-हज से 62,802 रुपये वसूल किए थे। इस फ़र्क़ पर उन्हें हैरत होरही है।

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