आज के दिन दी गई थी महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को फांसी

आज के दिन दी गई थी महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को फांसी

महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को आज के ही दिन यानि 15 नंवबर 1949 को फांसी के फंदे पर चढ़ाया गया था। वह एक कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादी समर्थक था। उसका जन्म 19 मई 1990 को महाराष्ट्र के पुणे के पास बारामती में हुआ था। उसके पिता का नाम विनायक वामनराव गोडसे था, जोकि पोस्ट ऑफिस में काम करते थे और माता लक्ष्मी गोडसे एक गृहणी थीं।

नाथूराम नहीं था हाईस्कूल पास

उसके बारे में कहा जाता है कि ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने की वजह से उसकी रुचि धार्मिक कार्यों में रहती थी। उसकी प्रारम्भिक शिक्षा पुणे में हुई थी, लेकिन हाईस्कूल के बीच में ही अपनी पढ़ाई-लिखाई छोड़ दी और बाद में भी कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली। धार्मिक पुस्तकों में गहरी रुचि होने के कारण रामायण, महाभारत, गीता, पुराणों के अतिरिक्त स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द, बाल गंगाधर तिलक और महात्मा गान्धी के साहित्य का गहरा अध्ययन किया था।

बापू के मौत के पीछे यह थी वजह

महात्मा गांधी की हत्या करने का प्रयास नाथूराम गोडसे कई बार चुका था, मगर वो सफल नहीं हो पा रहा था, लेकिन 30 जनवरी को उसने बापू की हत्या कर दी थी। वह खुद को हिंदू कट्टरवाद की विचारधारा से प्रेरित मानता था। ऐसा करने के पीछे उसकी सोच थी कि भारत के विभाजन और उस समय हुई साम्प्रदायिक हिंसा में लाखों हिन्दुओं की हत्या के लिए महात्मा गांधी ही जिम्मेदार थे। हालांकि इस हत्या के पीछे कुछ राजनीतिक दलों के होने की भी बात कही गई थी, लेकिन बहुत छानबीन करने के बाद भी इस हत्या में किसी भी दल के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।

प्रार्थना सभा में की थी हत्या

नाथूराम ने बापू की हत्या 30 जनवरी 1948 की शाम को नई दिल्ली स्थित बिड़ला भवन में गोली मारकर की थी। गांधी जी यहां रोज शाम को प्रार्थना किया करते थे। 30 जनवरी 1948 की शाम को जब वे संध्याकालीन प्रार्थना के लिए जा रहे थे तभी नाथूराम गोडसे ने पहले उनके पैर छूने के बहाने से नीचे झुका और फिर सामने से उन पर बैरेटा पिस्तौल से तीन गोलियां दाग दी थीं। उस समय गान्धी अपने अनुचरों से घिरे हुए थे। गोडसे ने बापू की हत्या प्रार्थना सभा में शामिल होने से पहले ही कर दी थी।

गोडसे को दी गई फांसी

हत्या के बाद गोडसे को गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया गया, जिसमें 8 नवंबर 1949 को उनका परीक्षण पंजाब उच्च न्यायालय, शिमला में किया गया था और फिर 15 नवंबर 1949 को नाथूराम गोडसे को अंबाला जेल में फांसी दे दी गई थी।

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