Tuesday , December 12 2017

आडवाणी-नीतीश की मुलाकात पर सियासत

राजद के प्रिन्सिपल सेक्रेटरी रामकृपाल यादव ने भाजपा और जदयू के दरमियान अगले लोकसभा इंतिखाबात में सेकुलर वोटों के ‘मैच फिक्सिंग’ का इल्ज़ाम लगाते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नाम पर भाजपा से अलग हुए नीतीश अब भी आडवाणी के साथ हैं। उ

राजद के प्रिन्सिपल सेक्रेटरी रामकृपाल यादव ने भाजपा और जदयू के दरमियान अगले लोकसभा इंतिखाबात में सेकुलर वोटों के ‘मैच फिक्सिंग’ का इल्ज़ाम लगाते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नाम पर भाजपा से अलग हुए नीतीश अब भी आडवाणी के साथ हैं। उन्होंने कहा कि आडवाणी नीतीश के गुरु रहे हैं। ऐसे में वे उनसे रिस्ता कैसे तोड़ सकते हैं।

खुफिया मुआहेदा उजागर : रामविलास

लोजपा के क़ौमी सदर रामविलास पासवान ने कहा कि साल 2002 के गुजरात दंगे की वजह नरेंद्र मोदी अगर फिरकापरस्त चेहरा हैं, तो आडवाणी ने 1992 में बाबरी मसजिद को ढहवा कर अपने दल के फिरका परस्त चेहरे को उजागर किया था। नीतीश की आडवाणी की मुलाकात ने इन दोनों पार्टियों के दरमियान खुफिया मुआहेदा को उजागर कर दिया है। नीतीश पर तंज़ करते हुए कहा, ‘उसके लीडर अपने मुखलेफीन से भी पूरे आदाब से मिलते हैं। उनसे हाथ मिलाने या साथ फोटो खिंचाने से परहेज नहीं करते हैं। ’

आदाब मुलाक़ात : भाजपा

साबिक़ नायब वजीरे आला सुशील मोदी ने कहा कि मुखतलिफ़ सियासी दलों के क़ायेदिनों का आदाब के तहत एक-दूसरे से मिलना आम है। यह अच्छी बात है कि वजीरे आला आडवाणी के पास गये और उनसे आदाब के तौर पर मुलाकात की। उन्होंने तंज़ करते हुए कहा कि सियासी मुखालेफीन अपनी जगह पर है, पर जो लोग आदाब का अमल नहीं करते उन्हें जवाब देना चाहिए कि क्या सियासत में इतनी भी दूरी होती है कि हम मुस्कुरायेंगे नहीं, हाथ नहीं मिलायेंगे और कन्नी काट कर चले जायेंगे।

जदयू के अपने दलील

जदयू के रियसती सदर वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि आडवाणी से वज़ीरे आला की मुलाकात आम आदाब का हिस्सा है। इस तरह से जम्हूरियत मजबूत होता है। आडवाणी सीनियर और भारतीय सियासत के कुछ जिंदा बचे कद्दावर क़ायेदिनों में से हैं। कई सालों तक साथ काम किया है, एक-दूसरे को मुबारकबाद देने में क्या बुराई है।

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