Friday , December 15 2017

आडवाणी ने वापस लिया इस्तीफा

नई दिल्ली, 12 जून: बीजेपी के पितामह लालकृष्ण आडवाणी ने अपने कदम वापस खींच लिए। उम्र की इस दहलीज पर खड़े आडवानी को संघ और भाजपा ने एक और मोहलत दे दी। बीते चौबीस घंटे के बाद मंगल की शाम आडवाणी अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए राजी हो गए।

नई दिल्ली, 12 जून: बीजेपी के पितामह लालकृष्ण आडवाणी ने अपने कदम वापस खींच लिए। उम्र की इस दहलीज पर खड़े आडवानी को संघ और भाजपा ने एक और मोहलत दे दी। बीते चौबीस घंटे के बाद मंगल की शाम आडवाणी अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए राजी हो गए।

मंगल के दिन दोपहर बाद इस मुसीबत को टालने के लिए जुटे लोगो ने संघ के चीफ मोहन भागवत से आडवाणी की बात कराई। बीजेपी सदर राजनाथ सिंह राजस्थान के बांसवाड़ा में थे। उन्हें इस बात की इत्तेला दी गई। दिल्ली वापसी पर राजनाथ हवाई अड्डे से सीधे आडवाणी के रिहायशगाह 30, पृथ्वीराज रोड पहुंचे।

सलाह व मशवरा के बाद लोगो ( Troubleshooters) ने एक बयान तैयार कर रखा था जिसे राजनाथ ने मीडिया के सामने पढ़ दिया। इस बयान में ही था कि आडवाणी पहले इस्तीफा वापस लें, बाकी की बातों पर बातचीत वक्त पर होगा।

ज़राए के मुताबिक संघ और आडवाणी के बीच मुज़ाकरात का रोल गुरुमूर्ति ने निभाई। बैठक के बाद राजनाथ को छोड़कर दिल्ली में मौजूद पार्लीमानी बोर्ड के सभी मेम्बर और लीडर आडवाणी के घर पर खाने के लिए इकंट्ठा हुए थे। इनमें अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, अनंत कुमार, रविशंकर प्रसाद आरती मेहरा समेत आडवाणी के घर के लोग भी शामिल थे। इस दौरान माहौल को सहज बनाने की कोशिशें हुईं।

मंगल की सुबह से ही यह माना जा रहा था कि कोई न कोई रास्ता निकाला जाना चाहिए। बताते हैं कि इसी नजरिए से भागवत और आडवाणी के बीच फोन पर गुफ्तगू कराई गई। पार्टी के ज़ज़बातो के मद्देनजर यह माना गया कि पार्लीमानी बोर्ड में लिए गए फैसलों का एहतेराम सभी को करना चाहिए। यानी नरेंद्र मोदी पर लिए गए फैसले को सभी को मानना होगा। साथ ही जो सुझाव आडवानी की त\रफ से दिए गए हैं उनका मुनासिब वक्त पर बात चीत के बाद हल किया जाए।

राजनाथ ने कहा, ‘अगर आडवाणीजी को पार्टी के कामकाज के बारे में कोई शिकायत है तो मैं उनसे तफ्सील से गुफ्तुगू करूंगा, और हल करने की कोशिश करूंगा।’ इससे पहले बांसवाड़ा में वह यह कहकर कि बीजेपी में फैसले वापस नहीं लिए जाते, वाजेह कर चुके थे कि नरेंद्र मोदी को इंतेखाबी मुहिम कमेटी का सदर बनाने का फैसला नहीं पलटा जाएगा।

मंगल को नागपुर से लौटने के तुरंत बाद नितिन गडकरी और उसके बाद मुरली मनोहर जोशी भी आडवाणी से मिलने गए। दरअसल, बीजेपी समेतसंघ के लोग भी मान रहे थे कि आडवाणीजी ने अपनी शिकायतों का बहुत गलत वक्त चुना। यह एक तरीके से शगुन बिगाड़ने जैसा है।

भरोसेमंद ज़राए के मुताबिक आडवाणी चाहते थे कि मोदी के बाबत कोई फैसला सभी के राय से पार्लीमानी बोर्ड में लिया जाए।

ध्यान रहे कि संघ किसी खास शख्स की शिकायत पर कोई कदम नहीं उठाता है। उसे जो भी फैसले लेने होते हैं वह अपने वक्त से लेता है। आडवाणी संघ के छोटे-छोटे मुदाखिलत से भी मायूस थे।

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