Saturday , December 16 2017

आदरणीय नीतीश जी! ‘मुझे गर्व है कि मुझमें मेरे पिता का स्वभाव है’, क्या आपके बेटे में आपका स्वभाव है?- तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव के फेसबुक पोस्ट से लिया गया –
आदरणीय नीतीश जी ने कहा मुझमें मेरे पिता का स्वभाव है। हाँ, मुझे गर्व है कि मुझमें मेरे पिता का स्वभाव और उनकी छाया-काया नज़र आती है। लेकिन आप दिल पर हाथ रखकर बतायें क्या आपके बेटे में आपका स्वभाव है? सीधी बात नो बकवास।

आपकी तरह राजनीति को नकारात्मकता के निम्नस्तर पर नहीं ले जाना चाहता लेकिन सच्चाई से आप बख़ूबी परिचित है। राज को राज ही रहने दो।

दरअसल नीतीश जी और सुशील मोदी में एक अघोषित जंग छिड़ी हुई है कि कौन कितने निम्नस्तर पर जाकर कितनी निम्नस्तरीय व्यक्तिगत टिप्पणी लालू परिवार के विरुद्ध करेगा। अब नीतीश जी उस स्तर पर सुशील मोदी की जगह प्राप्त करना चाहते है।

नीतीश जी राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर हमारा विरोध कर नहीं सकते क्योंकि उनका अपना कोई विचार,नीति,सिद्धांत और उसूल तो रहा नहीं इसलिए हमारे ख़िलाफ़ ओछी व्यक्तिगत टिप्पणियों पर उतर आए है।

नीतीश जी ने बिहार में कोई एक ऐसी पार्टी छोड़ी नहीं जिससे गठबंधन नहीं किया हो कोई एक भी अवसर ऐसा रहा नहीं जब इन्होंने अपने दम पर सरकार बनाई हों। और ना कभी बना पाएँगे। इसलिए विचारधारा के स्तर पर नीतीश जी शून्य हो चुके है।

राजद का जनाधार तो अंगद का पाँव है, इसपर जितना जोर लगेगा, उतना मजबूत होगा पर टस से मस नहीं होगा! सो सरकार के दोनों प्रमुख दलों के लिए आपस में एक दूसरे के जनाधार में सेंध मारना ही मजबूरी है।

इसी मजबूरी के नाते दोनों घटक दलों के मुखिया राजद को आड़े हाथों लेने के बहाने घटियापन की नई से नई गहराई के कीचड़ में सनने को व्याकुल रहते हैं। दोनों इस लालच में होड़ में लगे रहते हैं कि किस तरह से एक दूसरे की पार्टी का कद व जनाधार कम किया जाए!

यही कारण है कि सुशील मोदी और नीतीश कुमार हताशा में, सत्ता में होने के बावजूद, हर दूसरे दिन, विपक्ष की एक पार्टी पर निशाना साधते रहते हैं।

नीतीश कुमार याद करें महागठबंधन का मुख्यमंत्री रहते कभी उन्होंने नेता प्रतिपक्ष का व्यक्तिगत तो छोड़ो वैचारिक विरोध भी किया हो? चच्चा, पब्लिक आपके कर्म जान गई है।

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