आदर्श स्क़ाम सोसाइटी , इमारत हवाले कर दें : अदालत

आदर्श स्क़ाम सोसाइटी , इमारत हवाले कर दें : अदालत
बॉम्बे हाइकोर्ट ने आदर्श स्क़ाम सोसाइटी को इस बात की हिदायत दी है कि वो अपनी ग़लती को तस्लीम करे और मुतनाज़ा इमारत को वज़ारत-ए-दिफ़ा के हवाले कर दें क्योंकि क़ौम का तहफ़्फ़ुज़ सब से ज़्यादा अहम है। बॉम्बे हाइकोर्ट की दस्तूरी बैंच जो

बॉम्बे हाइकोर्ट ने आदर्श स्क़ाम सोसाइटी को इस बात की हिदायत दी है कि वो अपनी ग़लती को तस्लीम करे और मुतनाज़ा इमारत को वज़ारत-ए-दिफ़ा के हवाले कर दें क्योंकि क़ौम का तहफ़्फ़ुज़ सब से ज़्यादा अहम है। बॉम्बे हाइकोर्ट की दस्तूरी बैंच जो कि जस्टिस पी जी मजुमदार और आर डी धुन्नू का पर मुश्तमिल है, ने कहा कि इसमें कुछ ग़लत नहीं है कि आप (सोसाइटी) अपनी ग़लती को तस्लीम करे और ख़ुद को क़ानून के सपुर्द कर दे, क्योंकि आप अपनी ग़लती तस्लीम कर सकते हैं ताहम दिल नहीं बदल सकते।

अदालत ने कहा कि आप (सोसाइटी) का तल्लीन ,दहश्तगर्द या मुजरीमीन नहीं हैं। अदालत ने कहा कि क़ौम का तहफ़्फ़ुज़ अव्वलीन तर्जीह है। जस्टिस मजुमदार ने कहा कि हम को दहश्तगर्द हमलों से इस बात का सबक़ सीखना चाहीए कि वो सिर्फ़ होटल ताज महल तक आए हैं जबकि कल वो हस्सास दिफ़ाई तंसीबात पर हमलावर हो सकते हैं। उन्होंने इस को एक संगीन मसला बताया और कहा कि इस बात को मामूली नहीं समझना चाहीए।

उन्होंने महात्मा गांधी के पाक साफ़ किरदार की मिसाल देते हुए कहा कि सियासत दां और सरकारी ओहदेदारों को अपनी ग़लती महसूस करना चाहीए और बाबाए क़ौम के नक़श-ए-क़दम पर चलना चाहीए ताकि कल आने वाली नस्लें सियासतदानों के बुलंद हौसलों और ख़ुद्दारी को याद रखें ।

अदालत ने बी एमसी , एम एम आर डी ए दोनों को हिदायत दी कि वो आइन्दा समाअत के दौरान इस बात को वाज़िह करें कि आया उन्होंने आदर्श सोसाइटी को हरी झंडी बताते हुए स्कियोरिटी पहलू को मद्द-ए-नज़र रखा था। वाज़िह रहे कि कारगिल जंग के शहीदों के ख़ानदानों के लिए मुख़तस ए राज़ी पर तामीर शूदा आलीशान आदर्श नामी इमारत में हुए मुबय्यना स्क़ाम की तहक़ीक़ाती रिपोर्ट आज मर्कज़ी तफतीशी ब्यूरो (सी बी आई) ने बॉम्बे हाइकोर्ट में पेश कर दी।

इसी दौरान महाराष्ट्र की रियास्ती हुकूमत ने अदालत को बताया कि इसने इस मुआमले में मुबय्यना तौर पर मुलव्वस दो सीनीयर आई एस अफ्स्रान जयराज पाठक और प्रदीप व्यास को मुअत्तल कर दिया है और उन मुअत्तली इस स्क़ाम की तफ़तीश मुकम्मल होने तक जारी रहेगी।

जय राज पाठक मुंबई के म्यूनसिंपल कमिशनर थे। इस दौरान उन्होंने इमारत की ऊंचाई बढ़ाने की इजाज़त दी थी और मुख़्तलिफ़ क़वानीन की ख़िलाफ़वर्ज़ी की थी जबकि प्रदीप व्यास मुंबई के कलेक्टर थे । इस वक़्त उन्होंने इमारत के मकीनों को जाली और फ़र्ज़ी काग़ज़ात की बुनियाद पर आमदनी का सर्टीफ़िकेट जारी किया था जिस की बिना पर मकीनों को मकान दस्तयाब कराया गया था।

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