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आदिवासी की जमीन कोई छीन नहीं सकता : रघुवर दस

दुमका : उपराजधानी दुमका में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि सरकार ने एसपीटी एक्ट के मूल स्वरूप में कोई छेड़छाड़ नहीं किया है. कोई भी एक्ट को नहीं बदल सकता और न ही आदिवासियों की जमीन छीन सकता है. मुख्यमंत्री बुधवार को संताल परगना की पंचायतों की सरकार के सम्मेलन में बोल रहे थे. कार्यक्रम में संताल के सभी जिले से मुखिया, ग्राम पंचायत, स्वयं सेवकों व स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधियों का जुटान हुआ था. मुख्यमंत्री ने पहले सत्र में स्वयं सहायता समूहों में शामिल संताल की महिलाओं को संबोधित किया.

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कुछ विरोधी लोग हैं, जो खुद को आदिवासी और संताल परगना का हिमायती समझते हैं. वे नहीं चाहते कि आदिवासी के घर बिजली पहुंचे, उनके बच्चे पढ़ें. उन लोगों ने सिर्फ वोट बैंक के लिए इतने दिनों तक संताल परगना के लोगों का शोषण किया. आज सरकार संताल परगना के दबे-कुचले लोग और गरीबों के विकास के लिए उनके घरों तक पहुंच रही है, तो विरोधियों के पेट में दर्द हो रहा है.

संताल परगना में 11123 गांव के 50 ब्लॉक हैं और मात्र नौ हजार ही स्वयं सहायता समूह हैं. सिर्फ 17 ब्लॉक में ही स्वयं सहायता समूह हैं. इसलिए सरकार का प्रयास है कि सभी ब्लॉक व गांव में एसएचजी बने. इसमें महिलाओं को आत्म नियोजन का प्रशिक्षण दिया जाये. महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी, तो राज्य व देश का विकास होगा.

उन्होंने कहा राज्य सरकार नारी शक्ति के साथ है. हम हर जिले में हाट बनायेंगे, जहां ग्रामीण महिलाएं अपने हाथ से बनायी चीजों को बेच सकेंगी. पहला हाट 17 करोड़ की लागत से राजधानी रांची में बना है. यहां की महिलाएं, एसएचजी ग्रुप भी अपने उत्पादित सामान को बेचने के लिए वहां जा सकते हैं. वहां जाने-आने, रहने का प्रबंध भी सरकार करेगी. अगला हाट उपराजधानी दुमका में ही बनेगा. इसी तरह फेज वाइज हर जिले में हाट बनाने की योजना है. उन्होंने अच्छा कार्य करनेवाले कई स्वयं सहायता समूह का उल्लेख किया और उन्हें मुख्यमंत्री कोष से एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की.

मुख्यमंत्री ने कहा दिसंबर 2017 तक हर पंचायत को हम इंटरनेट से जोड़ देंगे. 2018 तक हमारी सरकार झारखंड के हर गांव में बिजली पहुंचा देगी. हम संताल परगना के लोगों के लिए रोजगार उत्पन्न करेंगे. उन्होंने सभी डीसी को निर्देश दिया कि संताली भाषा में भी सरकार की नीतियां प्रकाशित की जायें, ताकि यहां के लड़के-लड़कियां अपनी मातृभाषा में योजनाओं को जान सकें. उन्होंने हिंदी दिवस पर लोगों से अधिक से अधिक हिंदी का उपयोग करने की भी अपील की.

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