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आधार की अनिवार्यता को सुप्रीम कोर्ट पर मिली नई चुनौती

नई दिल्ली :  रिजर्व बैंक ने साफ किया कि बैंक अकाउंट्स को आधार कार्ड से लिंक करना प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत अनिवार्य है। आरबीआई के इस फैसले की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इसके पहले भी सुप्रीम कोर्ट में निजता के हनने का हवाला देते हुए आधार के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं, जिन पर अभी आखिरी फैसला आना बाकी है।

सुप्रीम कोर्ट में यह नई याचिका दायर हुई है।  23 मार्च को टेलिकॉम डिपार्टमेंट द्वारा जारी उस सर्कुलर को भी चुनौती दी गयी है जिसमें कहा गया था कि सभी नागरिकों को अपने मोबाइल नंबरों को भी आधार से लिंक करवाना होगा। याचिका के मुताबिक दोनों ही फैसलों से लोगों की निजता का हनन होता है इसलिए ये असंवैधानिक हैं।

याचिका वकील विपिन नायर के जरिए दाखिल की है जिसमें उन्होंने कहा है कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत नियमों में संशोधन करके बैंक खातों के साथ आधार को जोड़ने का फैसला उस वादे का उल्लंघन है जिसमें कहा गया था कि बायॉमीट्रिक्स का हिस्सा बनना स्वैच्छिक होगा। इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की उम्मीद है।

निजता का अधिकार संविधान की धारा 21 में दिए गए जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। अब 5 जजों की एक अन्य बेंच को तय करना है कि आधार के मामले में निजता के अधिकार का हनन होता है या नहीं।

बैंक कर्मचारियों के एक संगठन ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) ने भी बैंक खातों से आधार से जोड़ना अनिवार्य किये जाने का विरोध किया है। संगठन का कहना है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट आधार कार्ड के संबंध में अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक के लिए इसे स्थगित किया जाना चाहिए।

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