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आधार संबंधी सेवाओं के लिए कॉमन सर्विस सेंटर हो जायेंगे बंद

नई दिल्ली। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आधार संबंधी सेवाओं के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के साथ अनुबंध को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। इससे बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो जाएंगे जबकि करोड़ों रुपए का निवेश यूं ही बेकार चला जाएगा।

जानकारों के मुताबिक यूआईडीएआई के इस फैसले से 50 हजार लोग बेरोजगार हो जाएंगे क्योंकि सीएससी की अधिकांश कमाई आधार पंजीकरण और इसकी अद्यतन सेवाओं से ही होती है। ऐसे में इन केंद्रों के कर्मचारियों की नौकरी जाना तय है।

देशभर में करीब 2 लाख 80 हजार सीएससी हैं। अभी करीब 12 हजार ऐसे केंद्र आधार पंजीकरण और लगभग 45 हजार अद्यतन कार्य में लगे हैं। पहले 27 हजार केंद्र आधार संबंधी काम में लगे थे लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने फैसला किया कि आधार पंजीकरण केंद्र केवल सरकारी परिसर में ही काम कर सकते हैं।

केवल 12 हजार केंद्रों ने ही इस विकल्प को चुना। आधार सेवाएं देने के लिए वीएलई को कंप्यूटर और आंख की पुतली तथा उंगली के निशान को स्कैन करने करने वाली मशीन लगाने के वास्ते करीब 1.5 लाख रुपये का निवेश करना पड़ता है।

इन केंद्रों में करीब दस लाख लोगों को रोजगार मिला है और आने वाले वर्षों में यह संख्या एक करोड़ तक जा सकती है। इन केंद्रों की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए हाल में यह फैसला लिया गया कि हर ग्राम पंचायत में एक सीएससी होना चाहिए।

सीएससी इलेक्ट्रॉनिक सेवाएं देने वाली इंडिया लिमिटेड के मुख्य कार्याधिकारी दिनेश कुमार त्यागी ने कहा कि अभी देशभर में करीब 60 हजार ग्राम पंचायतों में सीएससी नहीं है। अलबत्ता अगले महने सभी पंचायतों को एक केंद्र दे दिया जाएगा।

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