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आनंद मैरिज ऐक्ट इसी हफ्ते से होगा लागू, सिखों की शादियां इसी ऐक्ट के तहत रजिस्टर होंगी

नई दिल्ली : दिल्ली में जल्द ही सिखों की शादियां आनंद मैरिज ऐक्ट के तहत रजिस्टर होंगी। 2012 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने आनंद मैरिज (अमेंडमेंट) बिल को पास किया था। इसके बाद सभी राज्यों को इसे लागू करने के लिए बोला गया। हरियाणा और पंजाब में यह ऐक्ट लागू हो चुका है।

कई सालों से थी मांग
हरियाणा सबसे पहला राज्य था जहां आनंद मैरिज ऐक्ट, 2012 को पास किया गया। इसके बाद पंजाब में बादल सरकार ने इसे पास किया। सिखों की मांग थी कि दिल्ली में भी इसे लागू किया जाए, जब संसद और राष्ट्रपति से इस बिल को पास कर दिया गया है। सिरसा ने बताया कि इसे लेकर कई लोगों ने उनसे मुलाकात की और एक्ट को पास कराने की बात कही। इसी के तहत, पहले हमने एलजी को लेटर लिखा और फिर मुलाकात की। सिरसा ने कहा कि ऐक्ट को पास कराने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी गई थी जिसके बाद इसे पास कराया गया। जल्द ही एलजी इसे नोटिफाई करेंगे जिसके बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।

NRI परिवारों को होती है दिक्कते
एलजी और सीएम को लिखे लेटर में सिरसा ने बताया कि विदेशों में रहने वाले सिखों को सबसे ज्यादा परेशानियां होती हैं। धर्म को लेकर वहां उन्हें कई मुसीबतों को झेलना पड़ता है। सिर्फ इसलिए कि उनकी शादियां आनंद मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर नहीं होतीं। इसके चलते उन्हें वहां कई सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। सिरसा ने कहा कि मैंने बाकी सभी राज्यों के मु्ख्यमंत्रियों को भी लेटर लिखकर आनंद मैरिज एक्ट, 2012 को लागू करने को कहा है, जिससे किसी भी सिख को परेशानी न हो।

मनजिंदर सिंह सिरसा, डीएसजीपीसी ने कहा, ‘ऐक्ट को पास कराने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी गई थी जिसके बाद इसे पास कराया गया। जल्द ही एलजी इसे नोटिफाई करेंगे जिसके बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।’

सिर्फ सिख धर्म में शादी को आनंद कारज कहा जाता है। आनंद कारज के लिए लग्न, मुहूर्त, शगुन-अपशगुन, नक्षत्रों की गणना, जन्मपत्रियों के निर्माण और मिलान के लिए कोई जगह नहीं है। भगवान पर आस्था रखने वालों के लिए आनंद कारज के लिए सभी दिन पवित्र माने गए हैं। आनंद कारज में सिखों की शादी गुरु ग्रंथ साहिब जी के सामने चार फेरे या फिर लावां लेकर ही पूरी होती है।

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