Friday , December 15 2017

आप की सेहत और चिड़चिड़ापन

चिड़चिड़े अफ़राद ( व्यक़्तियों) को कोई भी पसंद नहीं करता है । ख़ुसूसन इस चिड़चिड़ेपन का शिकार होने वाला शख़्स अगर मर्द हो तो ऐसे में इस के अहल-ए-ख़ाना ख़ुसूसन बीवीयों के लिए ये सूरत-ए-हाल ख़ासी परेशानकुन हो जाती है क्योंकि शौहर की बदमिज़ाज

चिड़चिड़े अफ़राद ( व्यक़्तियों) को कोई भी पसंद नहीं करता है । ख़ुसूसन इस चिड़चिड़ेपन का शिकार होने वाला शख़्स अगर मर्द हो तो ऐसे में इस के अहल-ए-ख़ाना ख़ुसूसन बीवीयों के लिए ये सूरत-ए-हाल ख़ासी परेशानकुन हो जाती है क्योंकि शौहर की बदमिज़ाजी उन के आपस के ताल्लुक़ात ( संबंध) को भी मुतास्सिर ( प्रभावित) करती है जबकि मुतअद्दिद ( कुछ) ख़ानगी ( निजी/घरेलू) मुआमलात भी इस बदमिज़ाजी की वजह से मतार (प्रभावित) होते हैं।

इसी हवाले से हाल ही में हुई एक तहक़ीक़ में दिलचस्प इन्किशाफ़ सामने आया (जाहिर हुआ)है कि बदमिज़ाजी या चिड़चिड़ापन कोई बुरी चीज़ नहीं बल्कि ये हमें ज़्यादा वाज़िह ( स्पष्ट ) अंदाज़ में सोचने का मौक़ा फ़राहम करता और यूं आप की सेहत पर भी ये चिड़चिड़ापन मुसबत असरात मुरत्तिब (संग्रह) करता है ।

इस बदमिज़ाजी की वजह से अगरचे उस शख़्स से बात करना पसंद तो नहीं करता है ताहम ऐसे अफ़राद ज़्यादा कामयाब ज़िंदगी बसर करते हैं । आस्ट्रेलिया में होने वाली इस तहक़ीक़ के बारे में माहिर-ए-नफ़सीयत प्रोफेसर जोफ़ोरगास का कहना है की उन्होंने तजुर्बात से साबित किया है कि ख़ुशमिज़ाज अफ़राद के मुक़ाबले में चिड़चिड़े लोगों की क़ुव्वत-ए-फै़सला ( निर्णय शक़्ती) ज़्यादा अच्छी होती है ।

जहां ख़ुशमिज़ाजी इंसान की तख़लीक़ी सलाहीयतों को उभारती है वहीं इंसान का चिड़चिड़ापन उसे ज़्यादा मुस्तइद ( चुस्त/ फुर्तीला) बनाता है और मुहतात अंदाज़ फ़िक्र अता करता है । एक बदमिज़ाज इंसान मुश्किल हालात से एक ख़ुश इंसान की निसबत ( तुलना) बेहतर तरीक़े से निमट सकता है और इस की वजह इंसानी दिमाग़ का मालूमात का तजज़िया ( जांचने) करने का तरीक़ा है ।

तहक़ीक़ में शामिल अफ़राद से कहा गया था कि वो मुख़्तलिफ़ फिल्में देखें और अपनी ज़िंदगी में पेश आने वाले मुसबत और मनफ़ी वाक़ियात ( नष्ट किए हुए घटनाएं) को याद करें और ये अमल उन्हें अच्छे या बुरे मूड में लाने के लिए किया गया । इस के बाद रज़ाकारों से कहा गया कि वो मुख़्तलिफ़ कामों में हिस्सा लें जिन में शहरी असातीर ( कहानीयों /कथाओं) की सच्चाई रखना और कुछ वाक़ियात आँखों देखा हाल ब्यान करना शामिल था।

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