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आबपाशी प्रोजेक्ट्स में 52,116 करोड़ का घोटाला?

हैदराबाद 22 जून: कम्पट्रोलर एंड आडीटर जनरल(सी ए जी) ने आंध्र प्रदेश के आबपाशी प्रोजेक्ट्स में संगीन घेटालें को आशकार किया है, जिस के नतीजे में मजमूई तौर पर 52,116 करोड़ रुपये का ख़सारा सरकार को बर्दाश्त करना पड़ा।

हैदराबाद 22 जून: कम्पट्रोलर एंड आडीटर जनरल(सी ए जी) ने आंध्र प्रदेश के आबपाशी प्रोजेक्ट्स में संगीन घेटालें को आशकार किया है, जिस के नतीजे में मजमूई तौर पर 52,116 करोड़ रुपये का ख़सारा सरकार को बर्दाश्त करना पड़ा।

प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल वाणी श्रीराम की निगरानी में ये रिपोर्ट तैयार की जिसे आज एवाने असेंबली में पेश किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक़ मंसूबा बंदी के फ़ुक़दान, ज़मीन को हासिल करने में ताख़ीर, प्रोजेक्ट्स की तकमील में ताख़ीर के अलावा प्रोजेक्ट्स की साख्त और कामों की नौवयित में तब्दीलियों के बाइस 52,116 करोड़ रुपये का नुक़्सान हुआ।

जलयग्नम आबपाशी प्रोग्राम का आग़ाज़ 2004 में आँजहानी चीफ मिनिस्टर डॉक्टर वाई एस राज शेखर रेड्डी ने किया था। ये प्रोग्राम 86 बडे आबपाशी प्रोजेक्ट्स पर मुश्तमिल है जिन की मजमूई लागत 1.86 लाख करोड़ रुपये थी।

रियासती हुकूमत ने इस प्रोग्राम पर ताहाल 80,000 करोड़ रुपये ख़र्च किए हैं। कैग ने सोशल सेक्टर की तन्क़ीह में भी कई खामियों और घेटालें की निशानदेही की है।

रिपोर्ट में बताया गया कि 2008-12 के दौरान हुकूमत की तरफ से बजट को मुंजमिद कर देने के बाइस पोस्ट मीट्रिक स्कालरशिपस में तकरीबन 24 फ़ीसद मुख़तस फ़ंड इस्तेमाल नहीं किया गया।

नूडल बैंकों, कॉरपोरेट इन्टरनेट बैंकिंग और पी डी एकाऊंटस के ज़रीये 176.83 करोड़ रुपये की मनज़ोरा स्कालरशिपस तक़सीम नहीं की गई।

कार्पोरेशंस से इनपुटस के बगैर हुकूमत की तरफ से फंड्स की इजराई के नतीजे में मर्कज़ी-ओ-रियासती हुकूमत की मुख़्तलिफ़ स्कालरशिप स्कीमात से मुताल्लिक़ 99.60 करोड़ रुपये इन कार्पोरेशंस के पास रुकी हुई है, जिन में मार्च 2012 के मुताबिक़ अकलियती मालीयाती कारपोरेशन के पास 80.70 करोड़ रुपये, क्रिस्चिएन माइनॉरिटी फाइनैंस कारपोरेशन के पास 10.44 करोड़ रुपये और उर्दू एकेडेमी के पास 8.46 करोड़ रुपये हैं।

रिपोर्ट में ये भी इन्किशाफ़ किया गया कि डिस्ट्रिक्ट बी सी वेलफेयर ऑफीसर हैदराबाद के चार डेवीज़नस में नवंबर 2010 ता दिसम्बर 2011 के दौरान 4,156 ई ज़ेड पीए टी एम कार्ड्स चोरी होगए और 17.25 करोड़ लाख रुपये धोका से 471 बैंक एकाऊंटस से निकाल लिए गए।

डिस्ट्रिक्ट वेलफेयर आफ़ेसरस तालिमी इदारों की तरफ से जारी करदा 70 फ़ीसद फ़ंड (,122 करोड़ रुपये) के सदाक़तनामे इस्तेमाल जारी नहीं किये गये।

रिपोर्ट में बताया गया कि अगरचे रियासती हुकूमत ने अकलियती बिरादरियों के तलब को स्कालरशिप की शरह पसमांदा तबक़ात के ख़ुतूत पर 2008-09 से बढ़ाई है ताहम स्कालरशिप मंज़ूर करते हुए इज़ाफ़ी शूदा शरहों की तामील नहीं की गई जिस के बाइस अकलियती बिरादरी के तलब को इज़ाफ़ी शूदा शरहों पर स्कालरशिपस नहीं मिल पाए जिन की मजमूई क़दर 2.70 करोड़ रुपये है।

सर्वे की बुनियाद पर रिपोर्ट में इन्किशाफ़ किया गया कि 66 फ़ीसद तलबा को एक ता तीन साल की ताख़ीर से स्कालरशिप हासिल हुए, 34 फ़ीसद तलबा को दरख़ास्तों के इदख़ाल में दुश्वारियां पेश आएं, 21 फ़ीसद तलबा स्कालरशिपस की मंज़ूरियों में मुश्किलात का सामना कररहे हैं, 9 फ़ीसद तलबा कॉलेज को पेशगी आर टी एफ अदा करने पर मजबूर हुए, 15 फ़ीसद तलबा को कामिल स्कालरशिपस नहीं मिली और 11 फ़ीसद तलबा ने बयान किया कि उनके ई ज़ैद पे कार्ड्स कॉलेज इंतेज़ामीया ने रख लिए हैं।

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