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आम आदमी के मुताबिक़ बदउनवानीयाँ माइल ब उरूज

नई दिल्ली, 08 दिसंबर: (पीटीआई) अब जबकि हिंदूस्तान में बदउनवानीयों ( Corruptions) के ख़िलाफ़ यके बाद दीगरे एहतिजाज मुनज़्ज़म किए जा रहे हैं वहीं आम आदमी को अब तक बदउनवानीयों से राहत नहीं मिली है क्योंकि 60% सल्म मकीनों का ये ख़्याल है कि गुज़श्ता एक

नई दिल्ली, 08 दिसंबर: (पीटीआई) अब जबकि हिंदूस्तान में बदउनवानीयों ( Corruptions) के ख़िलाफ़ यके बाद दीगरे एहतिजाज मुनज़्ज़म किए जा रहे हैं वहीं आम आदमी को अब तक बदउनवानीयों से राहत नहीं मिली है क्योंकि 60% सल्म मकीनों का ये ख़्याल है कि गुज़श्ता एक साल के दौरान बदउनवानीयों में इज़ाफ़ा हुआ है।

सी एम । इंडिया करप्शन स्टडी 2012 के मुताबिक़ सल्म ( Slum) में रहने वाले जिन अरकान से बातचीत की गई है इनमें से अक्सरीयत का यही कहना है कि अवामी ख़िदमात के शोबा में गुज़श्ता एक साल के दौरान बदउनवानीयों में इज़ाफ़ा हुआ है हालाँकि यही एक साल बदउनवानीयों के ख़िलाफ़ मुख़्तलिफ़ एहतिजाजों का सीज़न रहा।

सेंटर फ़ार मीडीया स्टडीज़ की जानिब से अहमदाबाद, बैंगलोर, भूवनेश्वर, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, गोवा, कोलकता और मुंबई के सलम इलाक़ों में सर्वे मुनाक़िद किया गया था और तक़रीबन हर एक की यही मुत्तफ़िक़ा राय थी कि बदउनवानीयों का ख़ातमा तो दौर की बात है, उलटा इसमें इज़ाफ़ा हो गया है ख़ुसूसी तौर पर महकमा पुलिस में सिर्फ़ 29 फ़ीसद सलम इलाक़ों में रहने वालों का ये ख़्याल है कि बदउनवानीयों में ना तो इज़ाफ़ा हुआ है और ना कमी बल्कि उसकी शरह ज्यों की त्यों बरक़रार है।

पुलिस और आबी सरबराही ऐसे महकमे बताए गए हैं जहां बदउनवानीयों में इज़ाफ़ा के बारे में अक्सरीयत ने शिकायत की। याद रहे कि अन्ना हज़ारे ने जब से बदउनवानीयों के ख़िलाफ़ अपनी तहरीक शुरू की है, इसके मुसबत असरात मुरत्तिब होना तो दूर की बात है उलटे मनफ़ी असरात मुरत्तिब होना शुरू हो गए हैं।

जब तहरीक के दौरान ये हाल है तो क्या लोक पाल बिल की मंज़ूरी के बाद अवाम को ये कह कर बहलाया फुसलाया जाता रहेगा कि क़ानूनसाज़ी होते ही बदउनवानी ख़त्म हो गई! बदउनवानी एक ऐसा इफ़रीयत है जिस पर फ़तह हासिल करना आसान नहीं है। ज़रूरत इस बात की है कि लोग अपनी ज़रूरीयात को महिदूद कर लें।

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