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आम हड़ताल से मुस्तहक़्क़ीन इमदादी वज़ाइफ़ से महरूम

तानडोर में 2 हज़ार से ज़ाइद अफ़राद एक वक़्त की रोटी के मुहताज तानडोर /18 अक्टूबर ( सियासत डिस्ट्रिक्ट न्यूज़ ) तेलंगाना आम हड़ताल के दौरान एक के बाद दीगर जे ए सी तंज़ीमें हड़ताल से दस्त बर्दारी इख़तियार करते हुए हुकूमत से फ़वाइद हासिल कर रही ह

तानडोर में 2 हज़ार से ज़ाइद अफ़राद एक वक़्त की रोटी के मुहताज तानडोर /18 अक्टूबर ( सियासत डिस्ट्रिक्ट न्यूज़ ) तेलंगाना आम हड़ताल के दौरान एक के बाद दीगर जे ए सी तंज़ीमें हड़ताल से दस्त बर्दारी इख़तियार करते हुए हुकूमत से फ़वाइद हासिल कर रही हैं । जबकि असल मसला तेलंगाना को 34 रोज़ा हड़ताल के बाद भी बालाए ताक़ रखा गया । मज़कूरा हड़ताल का मनफ़ी और तकलीफ़देह पहलू ये है कि मुलाज़मीन के हड़ताल पर चले जाने के नतीजा में ज़िला रंगा रेड्डी के 2 लाख 61 हज़ार जिन में ज़ईफ़ माज़ूर बेवा और दीगर मर्द-ओ-ख़वातीन शामिल हैं । मज़कूरा तमाम अफ़राद जारीया माह के इमदादी वज़ाइफ़ से महरूम होगए हैं । इन में से अक्सर बेबसी-ओ-बे कसी के आलम में मुताल्लिक़ा दफ़ातिर के चक्क्र काट रहे हैं । बेचारे मजबूर माज़ूर यन जिन के वज़ाइफ़ ही उन के जीने का आख़िरी सहारा हैं । वज़ाइफ़ से महरूमी के सबब अक्सर को नाफ़रमान औलाद ने घर से बाहर करदिया है और बाअज़ बेघर-ओ-बेसहारा अफ़राद वज़ाइफ़ ना मिलने के नतीजा में दरबदर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं । क़ायदा के मुताबिक़ हर माह की 5 तारीख़ को इमदादी वज़ाइफ़ तक़सीम किए जाते हैं । सरकारी मुलाज़मीन की आम हड़ताल की वजह से वज़ाइफ़ की तक़सीम-ए-अमल में नहीं लाई जा सकी । एक जायज़ा के मुताबिक़ ज़िला रंगा रेड्डी में 1 लाख 44 हज़ार वज़ीफ़ा पाने वाले ज़ईफ़ हज़रात हैं जबकि 82 हज़ार बीवाॶं की तादाद बताई जाती है । इसी तरह माज़ूर यन की कसीर तादाद को भी वज़ाइफ़ दिए जाते हैं । इमदादी वज़ाइफ़ की रक़म 200 ता 500 रुपय हुआ करती है । ज़िला के 33 मंडलों में वज़ाइफ़ की तक़सीम की जाती है । 34 रोज़ा आम हड़ताल ने एक तरफ़ तिजारत को मुतास्सिर किया है । दूसरी तरफ़ ग़रीब बेसहारा अफ़राद को वज़ीफ़ों से महरूम शहर तानडोर में 2 हज़ार से ज़ाइद अफ़राद जिन में ज़ईफ़ बीवाह माज़ूर यन शामिल हैं । इमदादी रक़म के ना मिल पाने से एक वक़्त की रोटी को मुहताज हैं । इन सब के बावजूद भी इन दर्द के मारों में से अक्सर एहसास है कि तेलंगाना केलिए जद्द-ओ-जहद बहरहाल जारी रहनी चाहीए । ताहम तलबा-ए-ओ- गरबा-ए-को मुतास्सिर किए बगै़र पुरअमन तहरीक चलाई जाय ।

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