Saturday , December 16 2017

आरएसएस को दहशतगर्द तंज़ीम ऐलान करेगा अमेरिका!

अमेरिकी वफाक़ी अदालत में एक सिख हुकूक की तंज़ीम ने दरखास्त दायर कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को गैर मुल्क की दहशतगर्द तंज़ीम ऐलान करने की मांग की है। जुनूबी न्यूयॉर्क जिले में वाके वफाक़ी अदालत ने दरखास्त पर अमेरिकी वज़ीर ए ख

अमेरिकी वफाक़ी अदालत में एक सिख हुकूक की तंज़ीम ने दरखास्त दायर कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को गैर मुल्क की दहशतगर्द तंज़ीम ऐलान करने की मांग की है। जुनूबी न्यूयॉर्क जिले में वाके वफाक़ी अदालत ने दरखास्त पर अमेरिकी वज़ीर ए खारेज़ा जॉन केरी को सम्मन जारी कर 60 दिन के अंदर जवाब मांगा है। सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने अपनी दरखास्त में अदालत से आरएसएस को गैर मुल्की दहशतगर्द तंज़ीम ऐलान करने की मांग की।

उसने इल्ज़ाम लगाया कि आरएसएस फासीवादी नज़रिया में यकीन करता है और हिंदुस्तान को एक ही किस्म के मज़हब और कल्चर पहचान वाला हिन्दू मुल्क बनाने के लिए जज़्बाती और तशद्दुद वाली मुहिम चला रहा है।

एसएफजे ने कहा कि आरएसएस ईसाइयों और मुसलमानों को जबरन हिन्दू बनाने के लिए अपने मुहिम “घर वापसी” के सबब सुर्खियों में बना हुआ है। दरखास्त में अदालत से गुजारिश किया गया है कि आरएसएस, इससे मु‍सलिक इदारो और इसके साथी तंज़ीमो को गैर मुल्की दहशतगर्द तंज़ीम के तौर पर और आरएसएस को खास तौर से आलमी दहशतगर्द तंज़ीम (एसडीजीटी) के तौर पर ऐलान किया जाए। आरएसएस पर अक्लियतों को निशाना बनाने का इल्ज़ाम लगाते हुए दरखास्त में कहा गया है कि बाबरी मस्जिद की शहादत, स्वर्ण मंदिर में फौजी मुहिम के लिए उकसाने, 2008 में गिरजाघरों को जलाने और ईसाई ननों से बलात्कार और 2002 में गुजरात दंगों में आरएसएस मुलव्वस रहा है।

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