Wednesday , June 20 2018

आर्टीकल 370 पर नज़ऱेसानी वक़्त का तक़ाज़ा : आर एस एस लीडर

आर एस एस लीडर इंद्रेश कुमार ने आर्टीकल 370 पर वसीअतर मुबाहिस की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और कहा कि इस से जम्मू-ओ-कश्मीर केलिए ख़ुसूसी मौक़िफ़ दिया गया है जबकि ये दफ़ा क़ौम के मुफ़ाद में नहीं है।

आर एस एस लीडर इंद्रेश कुमार ने आर्टीकल 370 पर वसीअतर मुबाहिस की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और कहा कि इस से जम्मू-ओ-कश्मीर केलिए ख़ुसूसी मौक़िफ़ दिया गया है जबकि ये दफ़ा क़ौम के मुफ़ाद में नहीं है।

इंद्रेश कुमार मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के बानी हैं उनका कहना है कि कश्मीर हिन्दुस्तान का अटूट हिस्सा है और आर्टीकल को इबतिदाई आरिज़ी इंतेज़ामात के लिए लाया गया था लेकिन उसको हुनूज़ बरक़रार रखना मुनासिब नहीं इस पर नज़र-ए-सानी ज़रूरी है।

ये जायज़ा लेना चाहिए कि आया आर्टीकल 370 ने क़ौम के मुफ़ादात को मल्हूज़ रखा है या नहीं इस पर वसीअतर ग़ौर-ओ-ख़ौज़ की ज़रूरत है। मुल्क के अवाम को ये मालूम होसके कि आहर इस के क्या फ़वाइद और नुक़्सानात हैं।

अगर ये क़ानून आरिज़ी दफ़आत का हिस्सा है तो ऐसी सूरत में उसकी मौजूदगी बेफ़ैज़ है। अगर हक़ीक़त में ये ज़रूरी है तो फिर हुनूज़ आरिज़ी क्यों रखा गया है आख़िर माज़ी में कांग्रेस हुकूमतों ने इस आर्टीकल को मुंतक़िल क्यों नहीं किया।

आख़िर वो लोग इस पर बेहस केलिए ख़ाइफ़ क्यों थे अब वक़्त आगया है कि आर्टीकल 370 पर नज़र-ए-सानी की जाये।

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