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आर एस एस का दहशतगर्दी से कोई ताल्लुक़ नहीं- राम माधव

आर एस एस तर्जुमान राम माधव ने 1995 में सुप्रीम कोर्ट की जानिब से हिंदुतवा के मौज़ू पर दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू दहशतगर्द की खबर‌ एक मख़सूस गोशा की जानिब से जाहिर‌ की गई है जिस का मक़सद आर एस एस के इमेज को दागदार बनाना है।

आर एस एस तर्जुमान राम माधव ने 1995 में सुप्रीम कोर्ट की जानिब से हिंदुतवा के मौज़ू पर दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू दहशतगर्द की खबर‌ एक मख़सूस गोशा की जानिब से जाहिर‌ की गई है जिस का मक़सद आर एस एस के इमेज को दागदार बनाना है।

उन्होंने ज़राए इबलाग़ से एक रस्मी बात‌ करते हुए कहा कि हिंदूओं को दहशतगर्द क़रार देना एक बहुत बड़ा झूट है। ये खबर इस तंज़ीम को दागदार बनाने की एक कोशिश है। उन्होंने कहा कि 2008 से चंद अरकान को जुमला 5 केसेस में गिरफ़्तार किया गया है और उन का ताल्लुक़ दहशतगर्दों से बताया गया है ताहम इस मुआमले में अभी तक ना ही कोई चार्ज शीट दाख़िल की गई है और ना ही इन में से किसी को ज़मानत हासिल हुई है।

उन्होंने कहा कि आर एस एस सिर्फ़ मुल्क को मुत्तहिद रखने के लिए काम कररही है। राम माधव ने मज़ीद कहा कि साबिक़ चीफ जस्टिस आफ़ सुप्रीम कोर्ट गजेंदरागाडकर ने 1966 में और जस्टिस जे एस वर्मा ने 1995 में अपने एक फैसले में ये वाज़िह करदिया है कि हिंदू अज्म सिर्फ़ एक तर्ज़-ए-ज़िदंगी है। उन्होंने कहा कि ये मसला जारिया साल मार्च में फिर दुबारा पेश होने वाला है।

राम माधव का ये तबसरा स्वामी असीमानंद को जेल होने के एक दिन के बाद सामने आया है जिसे समझौता एक्सप्रेस और दीगर बम धमाकों में माख़ूज़ किया गया है। वाज़िह रहे कि असीमानंद ने एक मैगज़ीन को दिए गए अपने इंटरव्यू में मुबय्यना तौर पर इस बात का उजागर‌ किया था कि आर एस एस क़ियादत ने ही दहशतगिर्दाना कार्यवाईयों की मंज़ूरी दी थी।ताहम आर एस एस ने इस इल्ज़ाम को सिरे से रद‌ करदिया।

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