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आलेर एनकाउंटर याक़ूब मेमन और अब यासीन भटकल ?

हैदराबाद 07 अगस्त:अवाम और महिकमे अक्सर हुकूमतों के ताबे होते हैं लेकिन मुल्क में इन दिनों हुकूमतें भी एक अंजान ताक़त के ताबे हो गईं हैं और दिल्ली से सरगर्म उस ताक़त के इशारों पर काम कर रही हैं।

मोतबर ज़राए के मुताबिक़ अपने नेटवर्क में माहिरे खुसूसी गिरोह की बात को वक़्त की हुकूमत भी नजरअंदाज़ नहीं कर सकती। जिसकी ताज़ा मिसालें आलेर में हुए एनकाउंटर और नागपुर जेल में दी गई फांसी है हालाँकि आलेर एनकाउंटर में मुल्ज़िमीन के बचाव‌ के लिए कोई गुंजाइश नहीं थी जबकि याक़ूब मेमन को दी गई फांसी में फांसी से बचाने की काफ़ी गुंजाइश थी ताहम मख़सूस लॉबी के इशारे हुकूमत के लिए फ़र्ज़शनासी का ज़रीया बन गए।

आख़िर ये टोली कौनसी है और किस के लिए काम करती है और इस टोली का मक़सद किया है और ये किस को फ़ायदा पहुंचाना चाहती है ।जमहूरी मुल्क में आमिराना मौक़िफ़ और वक़्त की हुकूमतें आख़िर क्युं इस टोली के आगे बेबस हैं।

दानिशवरों के मुताबिक़ इस टोली का एक मक़सद तो साफ़ हैके जो हुकूमत उन्हें ख़ुश करती है वो उन्हें ख़ुश करते हैं दुसरी सूरत हुकूमत को परेशानी में डाल देते हैं। इस तरह से असरअंदाज़ होने वाली टोली ने अपना असर मर्कज़ के अलावा तेलंगाना जैसी रियासत भर में दिखाया है।

नई तशकील शूदा रियासत और सेक्युलर इक़दार के चीफ़ मिनिस्टर जो मुसलमानों की बहबूद और तरक़्क़ी के लिए अमली इक़दामात पर यक़ीन रखते हैं उन्हें भी आख़िर क्युं मजबूर होना पड़ा। याक़ूब मेमन को नागपुर जेल में फांसी दे दी गई जबकि उनकी पैरवी एक मारूफ़ वकील कर रहे थे।

दानिशवरों के मुताबिक़ फांसी से पहले के हालात थे हिन्दुस्तान में ख़ुद एक नई तारीख़ रक़म की है। रात देर गए तक सुप्रीमकोर्ट में याक़ूब की अर्ज़ी की सुनवाई और फिर बाद में इस की दरख़ास्त को मुस्तर्द कर देना ये सब एक तशवीशनाक मरहला था।

हालाँकि फांसी तए हो चुकी थी। याक़ूब मेमन को 15 दिनों का वक़्त भी नहीं दिया गया जो आम तौर पर हर क़ैदी को दिया जाता है जिसकी रहम की दरख़ास्त को सदर ने मुस्तर्द कर दिया था जबकि याक़ूब मेमन को 15 दिन वक़्त देने की क़ानूनी गुंजाइश-ए-मौजूद थी ताहम उसकी सालगिरा के मौके पर ही उसे फांसी दे दी गई।

आलेर एनकाउंटर में जहां विक़ारुद्दीन उसके 5 साथीयों को हलाक कर दिया गया। इस मुआमले में मुस्लिम अवामी मुंख़बा नुमाइंदों की ख़ामोशी ने बाक़ी असर को पूरा कर दिया।

विक़ारुद्दीन और इसके गिरोह का जिस दिन एनकाउंटर हुवा उसी दिन आंध्र प्रदेश के ज़िला चित्तूर में एक बड़ा एनकाउंटर हुआ जिसमें 20 मुश्तबा सुर्ख़ संदल के स्मगलरस हलाक हो गए हालाँकि इस एनकाउंटर के ख़िलाफ़ तहक़ीक़ात बड़े पैमाने पर जारी हैं जबकि आलेर एनकाउंटर के ख़िलाफ़ स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम का तक़र्रुर किया गया जिसका ताहाल कोई पता नहीं।

समझा जाता हैके दिल्ली के जिस गिरोह के इशारों पर काम हुवा है उन्ही के इशारों पर तहक़ीक़ात मांद पड़ी हुई हैं। कौन है इस गिरोह के अरकान और उनका मक़सद किया है। ये एक राज़ की बात बन गया है ताहम इस बात को दोहराने के साथ कहा जा सकता हैके ये हुकूमतों पर ना सिर्फ-ए-असर अंदाज़ है बल्कि हुकूमतों के किरदार को भी मुतास्सिर करसकता है जिसके ख़ौफ़ से आलेर एनकाउंटर अंजाम देने की बात सामने आरही है।

याक़ूब मेमन और विक़ारुद्दीन उसके साथीयों के एनकाउंटर के बाद अब मुश्तबा दहश्तगर्द यसीन भटकल उनका निशाना समझा जा रहा है।

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